By अभिनय आकाश | Apr 18, 2026
मीडिल ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने वैश्विक कूटनीति और सैन्य गलियारों में खलबली मचा दी है। दावा किया जा रहा है कि पिछले 48 घंटों में चीन के चार विशालकाय कार्गो विमान ईरान के हवाई अड्डों पर गुपचुप तरीके से उतरे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन विमानों ने ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले अपने ट्रांसपॉडर्स बंद कर दिए थे ताकि उनकी पहचान और लोकेशन को रडार या सार्वजनिक ट्रैकिंग साइट से छिपाया जा सके। खुफिया सूत्रों का मानना है कि इन विमानों में उन्नत मिसाइल प्रणालियां, ड्रोन, तकनीक और अन्य भारी सैन्य साजो सामान लदे हुए थे। यह घटना सीधे तौर पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस हालिया वादे को चुनौती देती है जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आश्वासन दिया था कि चीन ईरान को किसी भी प्रकार के हथियारों की आपूर्ति नहीं करेगा।
इजराइल के लिए यह स्थिति रेड लाइन के पार है क्योंकि चीनी तकनीक से लेस ईरानी मिसाइलों को रोकना उसके आयरन डोम और एरो डिफेंस सिस्टम के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। उर्मजलडमरू मध्य में चीन की सक्रियता और ईरान को मिल रही सेटेलाइट मदद से वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं। फिलहाल बीजिंग ने इन दावों को दुष्प्रचार बताया है लेकिन ट्रांसपंडर बंद कर विमानों का उतरना एक ऐसी कहानी बयां कर रहा है जिसे झुठलाना मुश्किल हो रहा है। क्या बीजिंग की तरफ से वाशिंगटन को सीधी सैन्य चुनौती है? आने वाले कुछ दिन इस सवाल का जवाब तय करेंगे।
मीडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच अमेरिका ने स्टेट ऑफ हुरमोस में नाकेबंदी कर ईरानी जहाजों को इस रास्ते से ना गुजरने देने की धमकी दी है। हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान इस नाकेबंदी को आसानी से चकमा दे रहा है और इस रास्ते से कई जहाजों को बाहर निकाल लाया है। नाकेबंदी लागू होने के बाद से ईरान से जुड़े कई टैंकर रास्ते से गुजर चुके हैं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया था कि स्टेट ऑफ हु्मोस पर अब अमेरिका का नियंत्रण होगा। इसका मकसद इस नाकेबंदी के जरिए ईरान के तेल और गैस निर्यात को रोकना और इस अहम समुद्री रास्ते पर उसका नियंत्रण कमजोर करना था। 12 अप्रैल को नाकेबंदी की घोषणा हुई और 13 अप्रैल से अमेरिकी नौसेना ने इसे लागू करना शुरू किया। अमेरिका ने उतारे कई युद्धपोत। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार इस ऑपरेशन में 10,000 से ज्यादा सैनिक, मरीन, एयरमैन और एक दर्जन से ज्यादा युद्धपोत और कई विमान तैनात किए गए हैं। पहले 24 घंटों में अमेरिका ने दावा किया था कि कोई जहाज नाकाबंदी पार नहीं कर पाया है और छह व्यापारिक जहाजों को वापस लौटा दिया गया।