By Ankit Jaiswal | Jun 04, 2026
महिला पहलवान विनेश फोगाट और भारतीय कुश्ती महासंघ के बीच चल रहे चयन विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ की उस याचिका का समाधान कर दिया है, जिसमें दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसके तहत विनेश फोगाट को वर्ष 2026 एशियाई खेलों के चयन ट्रायल में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई थी।
मौजूद जानकारी के अनुसार सुनवाई के दौरान भारतीय कुश्ती महासंघ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एन. गोबर्धुन ने अदालत को बताया कि विनेश फोगाट को चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी गई थी, लेकिन वह चयनित होने में सफल नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रायल के दौरान कई विवाद उठे थे।
गौरतलब है कि भारतीय कुश्ती महासंघ ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 22 मई के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में विनेश फोगाट को 2026 एशियाई खेलों के लिए आयोजित चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी। इसके बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा था।
इससे पहले 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी विनेश फोगाट को 30 और 31 मई को आयोजित चयन ट्रायल में भाग लेने की अनुमति दी थी। अदालत ने उस समय यह सुनिश्चित किया था कि खिलाड़ी को प्रतिस्पर्धा का अवसर मिले और चयन प्रक्रिया प्रभावित न हो।
सुनवाई के दौरान भारतीय कुश्ती महासंघ की ओर से यह भी दलील दी गई कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने महासंघ के कुछ फैसलों को दुर्भावनापूर्ण और निंदनीय बताया था। महासंघ का कहना था कि ऐसी टिप्पणियों को रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए क्योंकि मामला अभी भी उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष लंबित है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि वह सभी कानूनी और तथ्यात्मक प्रश्नों को खुला छोड़ रही है ताकि भविष्य में यदि आवश्यकता पड़े तो संबंधित मंच पर इन पर विचार किया जा सके।
बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय कुश्ती महासंघ और कई पहलवानों के बीच विवाद लगातार चर्चा में रहे हैं। विनेश फोगाट भी उन प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रही हैं जिन्होंने खेल प्रशासन और चयन प्रक्रियाओं को लेकर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी थी। ऐसे में यह मामला केवल एक खिलाड़ी के चयन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल प्रशासन और खिलाड़ियों के अधिकारों से जुड़ा विषय भी बन गया था।
फिलहाल चयन ट्रायल की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और विनेश फोगाट उसमें सफल नहीं हो सकीं हैं। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने माना कि याचिका पर आगे सुनवाई करने का कोई व्यावहारिक उद्देश्य नहीं बचा है। हालांकि अदालत द्वारा सभी प्रश्न खुले छोड़ने का अर्थ है कि भविष्य में यदि कानूनी विवाद आगे बढ़ता है तो संबंधित पक्ष अपने तर्क फिर से प्रस्तुत कर सकते हैं। इस मामले पर खेल जगत और कानूनी विशेषज्ञों की नजर बनी हुई हैं।