Uttar Pradesh Election 2022: अपनी-अपनी पार्टियों का जोरदार प्रचार करने में जुटे किन्नर

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Feb 10, 2022

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रमुख पार्टियों से भले ही कोई किन्नर चुनाव मैदान में न हो लेकिन भाजपा की सोनम किन्नर और सपा की पायल किन्नर चुनाव में अपनी-अपनी पार्टियों के लिए जोरदार प्रचार कर रही हैं। उत्तर प्रदेश के नवगठित किन्नर कल्याण बोर्ड की पिछले साल उपाध्यक्ष नियुक्त की गयी सोनम किन्नर को राज्यमंत्री का दर्जा हासिल है। पायल किन्नर को सपा की किन्नर महासभा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। दोनों ही अपनी-अपनी पार्टियों के प्रति समर्थन जुटाने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर रही हैं।

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हालांकि उनका मानना है कि किन्नर समाज के प्रति समाज को और संवेदनशील बनाने के लिए अब भी काफी कुछ किया जाना बाकी है। उन्होंने कहा एक किन्नर को अब भी समाज में वर्जित माना जाता है और उन्हें सम्मान नहीं दिया जाता। मेरा मानना है कि हमारे समाज के लिए लोगों की इस गलत धारणा को खत्म करना मेरी जिम्मेदारी भी है और इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए यह एक मौका है। भाजपा का जोर शोर से प्रचार कर रही सोनम ने कहा कि अगर उनकी पार्टी उन्हें टिकट देती है तो वह जरूर चुनाव लड़ेगी, हालांकि उन्होंने टिकट नहीं मांगा है। दूसरी ओर पायल ने कहा कि उनका चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनसे चुनाव लड़ने के बारे में पूछा था, मगर उन्होंने मना कर दिया था। सोनम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में किन्नर समाज के लिए सर्वेक्षण का कार्य अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने इस सिलसिले में समाज कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव को एक पत्र लिखा था लेकिन अभी चुनाव की घोषणा हो गई और आचार संहिता लागू हो जाने की वजह से सर्वे शुरू नहीं हो सका। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में इस वक्त किन्नर मतदाताओं की संख्या 8853 है। पायल और सोनम दोनों का ही मानना है कि प्रदेश में किन्नर मतदाताओं की संख्या काफी कम है और वे चुनाव के नतीजों को प्रभावित नहीं कर सकते, मगर वे महसूस करते हैं कि वे भी समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं लिहाजा चुनाव प्रक्रिया में उन्हें भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पायल ने कहा, किन्नर समाज को कोई भी महत्व नहीं देता। बहुत कम किन्नर ऐसे होंगे जिनके पास मतदाता पहचान पत्र हैं। कोई भी किन्नरों की वित्तीय मदद नहीं करता। यहां तक कि घर खरीदने के लिए उन्हें कर्ज भी नहीं मिलता।

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