By अंकित सिंह | Dec 16, 2025
कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य सोनिया गांधी ने मंगलवार को शून्यकाल के दौरान लाखों महिला फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की दुर्दशा को उजागर करते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत आशा (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता), आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों तथा सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने के लिए तत्काल सुधारों की मांग की।
कांग्रेस नेता ने कहा कि एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) योजना के लिए केंद्रीय भूमिका निभाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को केंद्र सरकार से कार्यकर्ताओं के लिए लगभग 4,500 रुपये और सहायिकाओं के लिए 2,250 रुपये का मूल मानदेय मासिक रूप से मिलता है, जिसमें राज्यों द्वारा समय-समय पर अतिरिक्त राशि जोड़ी जाती है। उन्होंने देशभर में आईसीडीएस के विभिन्न स्तरों पर लगभग 3,00,000 रिक्तियों की ओर इशारा किया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों बच्चों और माताओं को आवश्यक पोषण, स्वास्थ्य जांच और प्रारंभिक शिक्षा सेवाओं से वंचित होना पड़ रहा है।
गांधी ने सेवा वितरण को प्रभावित करने वाली कर्मचारियों की कमी की ओर भी इशारा करते हुए कहा कि कम वेतन के अलावा, वर्तमान में आईसीडीएस में विभिन्न स्तरों पर लगभग तीन लाख रिक्तियां हैं। इन कमियों के कारण लाखों बच्चे और माताएं आवश्यक सेवाओं से वंचित रह जाते हैं। यहां तक कि जब ये पद भर भी दिए जाते हैं, तब भी 2011 के बाद से अद्यतन जनगणना के आंकड़ों के अभाव के कारण जनसंख्या के मानदंडों से कम पड़ते हैं।
कांग्रेस नेता ने सरकार से राज्यों के सहयोग से उपायों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया, जिनमें सभी मौजूदा रिक्तियों को भरना, सभी कर्मचारियों को समय पर पारिश्रमिक सुनिश्चित करना, इन अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं के वेतन में केंद्र सरकार के योगदान को दोगुना करना, 2,500 से अधिक आबादी वाले गांवों में एक अतिरिक्त आशा कार्यकर्ता की नियुक्ति करना और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की संख्या को दोगुना करना शामिल है, ताकि मौजूदा पोषण और स्वास्थ्य पहलों के अतिरिक्त प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को सक्षम बनाया जा सके।