By अंकित सिंह | Oct 24, 2026
एक विशेष NIA अदालत ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक और छह अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में मुकदमा चलाने का आदेश दिया है। यह मामला पाकिस्तान से हवाला के जरिए कथित विदेशी फंडिंग से जुड़ा है। अदालत ने निर्देश दिया है कि 19 नवंबर से अभियोजन पक्ष के सबूत दर्ज किए जाएं। प्रतिबंधित संगठन 'जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट' (JKLF) के चेयरमैन यासीन मलिक, दिल्ली की तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए और उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया। उन्होंने अदालत से कहा कि वह इस मामले में अपना पक्ष रखेंगे। यह सुनवाई बंद कमरे में हुई।
यह मामला 2017 में दर्ज NIA की एक जांच से जुड़ा है। ED ने कथित मनी लॉन्ड्रिंग के सिलसिले में 14 जून 2017 को अपनी शिकायत दर्ज की थी। ये आरोप अभियोजन पक्ष के मामले का हिस्सा हैं और मुकदमे के दौरान इनकी जांच की जाएगी। 9 सितंबर को, विशेष NIA अदालत ने निर्देश दिया कि सभी सात आरोपियों के खिलाफ 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA) के तहत आरोप तय किए जाएं। अदालत ने माना कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से आरोपियों के खिलाफ गहरा संदेह पैदा होता है, जिससे अब मामले की सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
यासीन मलिक के अलावा, आरोपियों में जहूर अहमद शाह वटाली, शब्बीर अहमद शाह, मसरत आलम और अब्दुल रशीद शेख शामिल हैं। इस मामले में नवल किशोर कपूर और ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड पर भी मुकदमा चल रहा है। यासीन मलिक फिलहाल तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उन्हें 2022 में टेरर-फंडिंग (आतंकवाद के लिए धन मुहैया कराने) के एक मामले में दोषी ठहराया गया था।