By Ankit Jaiswal | Oct 27, 2026
खेलों में प्रतिबंधित दवाओं और तरीकों के इस्तेमाल को रोकने के लिए भारत अब अपने नियमों को और सख्त करने की तैयारी कर रहा है। खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने घोषणा की है कि डोपिंग से जुड़े मामलों में कार्रवाई मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय डोपिंग रोधी कानून में फिर बदलाव किए जाएंगे। इस कदम के तहत खिलाड़ियों के साथ-साथ प्रशिक्षकों और प्रतिबंधित पदार्थों की आपूर्ति से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी ध्यान दिया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि खेलों में बेहतर प्रदर्शन के साथ ईमानदारी भी जरूरी है। खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थों या गलत तरीकों के बजाय अपनी प्रतिभा, तैयारी और कड़ी मेहनत के आधार पर आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि डोपिंग के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए कानून के साथ-साथ जागरूकता और जांच व्यवस्था को भी मजबूत करना जरूरी है।
भारत में डोपिंग रोकने के लिए राष्ट्रीय डोपिंग रोधी कानून, 2022 और वर्ष 2025 में इसमें किए गए बदलावों के जरिए कानूनी और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत किया गया है। ये दोनों जुलाई 2026 में लागू हुए। अब सरकार संसद के अगले सत्र में कानून में एक और संशोधन लाने की योजना बना रही है। इसके तहत डोपिंग से जुड़े उल्लंघनों पर आपराधिक प्रावधान शामिल करने की तैयारी है, ताकि ऐसे मामलों में अधिक प्रभावी कार्रवाई की जा सके। इसमें खिलाड़ियों को प्रतिबंधित पदार्थ उपलब्ध कराने वालों और प्रशिक्षकों की भूमिका भी शामिल होगी।
गौरतलब है कि डोपिंग केवल किसी खिलाड़ी के व्यक्तिगत फैसले तक सीमित नहीं हो सकती। कई मामलों में प्रतिबंधित पदार्थों की उपलब्धता, गलत सलाह और खेल से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच करनी पड़ती है। ऐसे में प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य इस पूरी व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाना है।
डॉ. मांडविया के मुताबिक, राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी ने 2025-26 के दौरान 7,000 से अधिक जांच कीं। इसके अलावा, एजेंसी ने जागरूकता और शिक्षा से जुड़े 350 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें करीब 27,000 लोगों ने हिस्सा लिया। एजेंसी जोखिम के आधार पर जांच करने और खुफिया जानकारी के सहारे मामलों की पड़ताल करने पर भी जोर दे रही है।
मंत्री ने ‘नो योर मेडिसिन’ मोबाइल ऐप का भी जिक्र किया। इस ऐप पर 5 लाख से अधिक बार दवाओं से जुड़ी जानकारी खोजी जा चुकी है। इसके जरिए खिलाड़ी यह समझ सकते हैं कि किसी दवा में प्रतिबंधित पदार्थ तो मौजूद नहीं है। इससे अनजाने में नियम तोड़ने का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय और यूनेस्को के बीच एक समझौता होने वाला है। इसके तहत भारत के स्कूलों में ‘स्पोर्ट वैल्यूज इन एवरी क्लासरूम’ कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसका उद्देश्य बच्चों में खेल भावना, नैतिकता और ईमानदारी जैसे मूल्यों को बढ़ावा देना है, ताकि लाखों युवाओं तक कक्षाओं के जरिए यह संदेश पहुंच सके।
बैठकों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डोपिंग रोकने, सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारियां तय करने, शिक्षा और शोध को बढ़ावा देने तथा देशों के बीच नियमों के पालन की व्यवस्था मजबूत करने पर भी चर्चा हुई। साथ ही, 2026 से 2031 तक की कोष संचालन योजना, संसाधन जुटाने और अलग-अलग देशों की क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विचार किया गया, ताकि दुनिया भर में खेलों को साफ-सुथरा बनाए रखने के प्रयास लंबे समय तक जारी रह सकें।