By रेनू तिवारी | Feb 18, 2026
श्रीलंका के सांसदों ने मंगलवार को अपनी पेंशन रद्द करने के पक्ष में भारी बहुमत से मतदान कर एक मिसाल कायम की है। यह साहसिक कदम देश के गंभीर आर्थिक संकट और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच सरकार द्वारा किए गए एक प्रमुख चुनावी वादे को पूरा करने के लिए उठाया गया है। 225 सदस्यीय श्रीलंकाई संसद में इस विधेयक को लेकर जबरदस्त सहमति देखने को मिली।
वर्ष 2024 में चुने गए राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके ने अपने चुनाव अभियान के दौरान पेंशन संबंधी प्रावधान को समाप्त करने का वादा किया था। इसी तरह दिसानायके सरकार ने जनता की मांग पर पूर्व राष्ट्रपतियों को मिलने वाली सुविधाओं को सितंबर में समाप्त कर दिया।
इनमें आवास, भत्ते, पेंशन और परिवहन के लिए सरकारी अनुदान शामिल थे। विधि मंत्री हर्षना नानायक्कारा ने संसद में पेंशन संबंधी विधेयक पेश करते हुए कहा कि चुनावी वादा पूरा किया गया है और सांसदों को ऐसे समय में पेंशन प्राप्त करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है जब देश अपने सबसे बुरे आर्थिक संकट से उबरने के लिए संघर्ष कर रहा है।
श्रीलंका ने 83 अरब डॉलर से अधिक का कर्ज होने पर अप्रैल 2022 में खुद को दिवालिया घोषित कर दिया था। इसमें से आधे से अधिक कर्ज विदेशी लेनदारों का है।