श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने भाई और वित्त मंत्री बेसिल राजपक्षे को बर्खास्त किया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Apr 04, 2022

कोलंबो। अब तक के सबसे बुरे आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने सोमवार को अपने भाई और वित्त मंत्री बेसिल राजपक्षे को उनके पद से बर्खास्त कर दिया। बेसिल ने श्रीलंका को मौजूदा विदेशी मुद्रा संकट से निपटने में मदद करने के लिए भारत से आर्थिक राहत पैकेज हासिल करने पर बातचीत की थी। उनकी जगह अली साबरी को वित्त मंत्री नियुक्त किया गया है, जो रविवार रात तक न्याय मंत्री थे। बेसिल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से राहत पैकेज हासिल करने के लिए अमेरिका जाने वाले थे।

इसे भी पढ़ें: सिंगापुर में सेना प्रमुख नरवणे ने द्वितीय विश्व युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी

नयी नियुक्तियों से पहले राष्ट्रपति गोटबाया ने देश के सभी विपक्षी दलों से एकता मंत्रिमंडल में शामिल होने की अपील की। राष्ट्रपति के इस आमंत्रण को भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहे श्रीलंका के लोगों के गुस्से को शांत करने की सरकार की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सभी विपक्षी दलों को सरकार ने ऐसे वक्त में आमंत्रित किया है, जब लोगों में देश की आर्थिक स्थिति को संभाल नहीं पाने को लेकर सत्तारूढ़ राजपक्षे परिवार के प्रति बहुत आक्रोश है। विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से सरकार द्वारा कथित रूप से ‘गलत तरीके से निपटे जाने’ को लेकर मंत्रियों पर जनता का भारी दबाव था। देश में विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए कर्फ्यू लगा दिया गया था, बावजूद इसके रविवार शाम व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनों के तीव्र होने पर सरकार ने रविवार को 15 घंटों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया। लोगों ने कर्फ्यू की अवज्ञा करते हुए ईंधन और गैस के लिए लगने वाली लंबी कतारों और घंटों लंबी बिजली कटौती के खिलाफ प्रदर्शन किया।

इस बीच, सेंट्रल बैंक के गवर्नर अजित निवार्ड काबराल ने भी अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है। काबराल ने कहा, ‘‘सभी कैबिनेट मंत्रियों के इस्तीफा देने के मद्देनजर मैंने भी गवर्नर पद से इस्तीफा दे दिया है।’’ काबराल पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की संरचनात्मक समायोजन सुविधा के जरिये श्रीलंका के लिए आर्थिक राहत मांगने के मुद्दे पर अड़ियल रुख अपनाने का आरोप लगाया गया था। काबराल के विरोध के बावजूद सरकार ने मदद के लिए आईएमएफ का रुख किया है। उनके गवर्नर रहते सेंट्रल बैंक पर बड़ी मात्रा में नोटों की छपाई करने का आरोप लगा था, जिससे देश में महंगाई तेजी से बढ़ी।

प्रमुख खबरें

Hindustan Zinc में Stake Sale की तैयारी, ₹80,000 करोड़ का Disinvestment Target पूरा करेगी सरकार

Womens Asia Cup से पहले Pakistan को बड़ा झटका, Najiha Alvi चोटिल होकर बाहर, Sadaf Shamas की हुई एंट्री

England Cricket में बड़ा बवाल, Nightclub के बाहर हथकड़ी में दिखे Brydon Carse टेस्ट मैच से बाहर

हरियाणा में Godrej Group का मेगा प्लान, 20,000 करोड़ के Investment से खुलेंगे 40,000 Jobs के नए द्वार