अब एक हफ्ते के लिए टली नेपाल की सत्तारूढ़ पार्टी की बैठक, कब तक बचेंगे ओली?

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 10, 2020

काठमांडू। प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के राजनीतिक भविष्य का फैसला करने वाली, नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की एक अहम बैठक शुक्रवार को एक बार फिर स्थगित हो गई। इस बार देश में बाढ़ आने की वजह का हवाला देते हुए एक हफ्ते के लिए बैठक टाल दी गई है। भारत विरोधी टिप्पणियों और कामकाज की शैली को लेकर ओली के इस्तीफे की मांग की जा रही है। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की 45 सदस्यीय शक्तिशाली स्थायी समिति की बैठक शुक्रवार को होनी थी। एनसीपी के प्रवक्ता नारायण काजी श्रेष्ठ ने पत्रकारों को बताया कि बचाव एवं राहत कार्यों और मूसलाधार बारिश के बाद बृहस्पतिवार से देश भर में बाढ़ तथा भूस्खलनों से और अधिक नुकसान होने से रोकने के प्रयासों में पार्टी के लगे होने के कारण बैठक टाल दी गई है। देश के पश्चिमी हिस्से में कास्की, लमजुंग और रुकुम जिलों में बृहस्पतिवार को कई भूस्खलनों में कम से कम 12 लोग मारे गए।

इसे भी पढ़ें: नवगठित मधेसी पार्टी ने नेपाली चुनाव आयोग में कराया पंजीकरण, देश की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनी

माना जाता है कि ओली का झुकाव चीन की ओर है। मीडिया में आयी खबरों के अनुसार, ओली और प्रचंड ने अपने मतभेदों को दूर करने के लिए कई दौर की बातचीत की। ओली पर प्रधानमंत्री और पार्टी के अध्यक्ष पदों से इस्तीफा देने का जबरदस्त दबाव है क्योंकि एनसीपी के ज्यादातर नेताओं ने कोविड-19 वैश्विक महामारी से निपटने में सरकार की नाकामी और पार्टी को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा फैसले लेने के कारण उनसे ऐसा करने को कहा है। रविवार को चीनी राजदूत होउ यान्की ने ओली और प्रचंड के बीच मध्यस्थता के लिए वरिष्ठ नेताओं और पूर्व प्रधानमंत्री माधव नेपाल तथा झालानाथ खनल से मुलाकात की। प्रचंड के नेतृत्व वाले धड़े ने ओली से प्रधानमंत्री पद के साथ ही पार्टी के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा देने को कहा है जबकि ओली इन दोनों अहम पदों में से किसी को भी छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। स्थायी समिति के सदस्य गणेश शाह ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कैडर की ओर से एक पद एक व्यक्ति के सिद्धांत का पालन करने की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर ओली दोनों में से एक पद छोड़ देते हैं तो मौजूदा संकट का हल तलाशा जा सकता है। एनसीपी में पिछले कुछ महीनों से उथल-पुथल चल रही है लेकिन ओली राष्ट्रवादी नारा देकर और नेपाल के राजनीतिक नक्शे में बदलाव करके असंतुष्ट खेमे का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपने देश के राजनीतिक नक्शे में भारत के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण तीन क्षेत्रों लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को शामिल कर लिया। हालांकि पार्टी में अंदरुनी मतभेद पिछले हफ्ते फिर सामने आए जब ओली ने प्रचंड के नेतृत्व वाले असंतुष्ट खेमे पर नेपाल के दक्षिणी पड़ोसी की मदद से उन्हें हटाने की साजिश रचने का आरोप लगाया।

प्रमुख खबरें

Shahjahanpur Nagar Nigam पार्षदों के रकम बांटने की शपथ वाले वीडियो पर जांच शुरू

Love Horoscope For 25 August 2026 | आज का प्रेम राशिफल 25 अगस्त 2026 | प्रेमियों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन

दिल्ली में H1N1 के बढ़ते Cases, CM ने बुलाई Emergency Meeting, Schools को Advisory

Video: Awarapan 2 की सक्सेस पार्टी में दिखा Disha Patani का बोल्ड अवतार, इंटरनेट बढ़ा पारा