By अभिनय आकाश | Jul 21, 2023
जम्मू एवं कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) प्रमुख यासीन मलिक की व्यक्तिगत उपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सवाल किया कि जब ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया गया तो उन्हें अदालत में क्यों लाया गया। अदालत जम्मू विशेष अदालत के आदेश के खिलाफ सीबीआई की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने चार भारतीय वायुसेना कर्मियों की हत्या और 1989 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ़्ती मुहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के अपहरण से संबंधित मामलों में गवाहों से जिरह के लिए यासीन मलिक की शारीरिक उपस्थिति के लिए एक नया उत्पादन वारंट जारी किया था।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने पीठ को सूचित किया कि शीर्ष अदालत के आदेश की गलत व्याख्या के कारण जेल अधिकारियों द्वारा मलिक को लापरवाही से जेल से बाहर लाया गया था। उन्होंने पीठ से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया कि ऐसा कोई आदेश नहीं है।