By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 25, 2026
उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि निजी कंपनियों की कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और आयकर रिटर्न (आईटीआर) जैसे संवेदनशील डेटा तक पहुंच ‘‘चिंताजनक’’ है और केंद्र को ऐसे सुरक्षा उपाय बनाने पर विचार करना चाहिए ताकि ऐसी जानकारी का गलत दुरुपयोग न हो। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को एक व्यावसायिक प्रौद्योगिकी तंत्र के पनपने पर चिंता जताई, जो कथित तौर पर भविष्य निधि और आयकर रिकॉर्ड में मौजूद संवेदनशील निजी जानकारी तक पहुंच बनाता है, उसे प्राप्त करता है और सत्यापित करता है। प्रधान न्यायाधीश ने इस मुद्दे पर पीयूष शर्मा की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए सुझाव दिया कि केंद्र सरकार क्षेत्र विशेषज्ञों की मदद से इस मुद्दे से निपटने के लिए एक असरदार तरीका बनाए।
जनहित याचिकाकर्ता के अनुसार, इस प्रक्रिया में न तो ओटीपी जनरेट हुआ, न ही साफ़ तौर पर सहमति ली गई और न ही कोई साफ़ तौर पर दिखने वाला अधिकृत पहचान सत्यापन हुआ। हालांकि, याचिकाकर्ता ने सरकारी एजेंसियों द्वारा डेटा लीक होने का कोई आरोप नहीं लगाया। इसके बजाय, उन्होंने अलग-अलग कानूनों के तहत सरकारी अधिकारियों को दी गई निजी जानकारी की असुरक्षित स्थिति पर जोर दिया और दावा किया कि ऐसे डेटा तक बाद में निजी कंपनियां बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के पहुंच सकती हैं।
याचिकाकर्ता ने कहा, ‘‘ईपीएफओ और आयकर आंकड़ों को नियंत्रित करने के कानूनी ढांचे के बावजूद, एक उभरता हुआ और चिंताजनक पैटर्न दिख रहा है।’’ इन दलीलों का संज्ञान लेते हुए पीठ ने सरकार से कहा कि वह ‘‘निजी कंपनियों द्वारा व्यक्तिगत डेटा के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाए।