By अभिनय आकाश | Sep 29, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को साफ़ किया कि फ़ोर्टिस के पूर्व प्रमोटरों से जुड़े दाइची सैंक्यो विवाद में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश से होने वाला फ़ोरेंसिक ऑडिट, फ़ोर्टिस हेल्थकेयर लिमिटेड (FHL) और उसकी होल्डिंग कंपनी फ़ोर्टिस हेल्थकेयर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड (FHHPL) के ख़िलाफ़ है, न कि उन बैंकों के ख़िलाफ़ जो इन लेन-देन में शामिल थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने साफ़ किया कि बैंकों के रिकॉर्ड की जांच सिर्फ़ उन खास लेन-देन के संदर्भ में की जाएगी जो FHL, FHHPL और फ़ोरेंसिक ऑडिट के दायरे में आने वाले 'जजमेंट डेटर्स' (जिनके ख़िलाफ़ फ़ैसला आया है) से जुड़े हैं। बैंकों का खुद का कोई सामान्य फ़ोरेंसिक ऑडिट नहीं किया जाएगा। यह स्पष्टीकरण यस बैंक और एक्सिस बैंक की उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आया, जिनमें उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट के 31 अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें FHL और उसकी होल्डिंग कंपनी के कुछ लेन-देन का फ़ोरेंसिक ऑडिट करने का निर्देश दिया गया था। बैंकों ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेश की भाषा बहुत व्यापक थी और इससे यह गलतफहमी हो सकती थी कि फ़ोरेंसिक ऑडिट बैंकों के ख़िलाफ़ भी किया जा रहा है।
यह प्रवर्तन कार्यवाही दाइची के उस आर्बिट्रल अवॉर्ड से जुड़ी है जिसमें फोर्टिस के पूर्व प्रमोटरों को रैनबैक्सी शेयरों की बिक्री को लेकर हुए विवाद के बाद ब्याज सहित ₹2,562 करोड़ का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट के फोरेंसिक-ऑडिट आदेश का मकसद FHL शेयरों और एसेट्स से जुड़े उन लेन-देन का पता लगाना है जो अवॉर्ड के निपटारे के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने अब स्पष्ट कर दिया है कि बैंकों की भूमिका केवल ऑडिट के दायरे में आने वाले लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने या उनकी जांच कराने तक ही सीमित है। यह स्पष्टीकरण सुप्रीम कोर्ट के 25 सितंबर के उस आदेश के बाद आया है जिसमें फोरेंसिक-ऑडिट निर्देश को चुनौती देने वाली FHL की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया गया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि फोर्टिस के खिलाफ हाई कोर्ट की टिप्पणियां शुरुआती (टेंटेटिव) थीं और उन्हें कंपनी के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाएगा।