By अभिनय आकाश | Oct 08, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस सिर्फ़ इसलिए नहीं चलाया जा सकता कि उसने लिव-इन पार्टनर के तौर पर रिश्ता खत्म कर लिया या शादी करने से इनकार कर दिया और इसके बाद दूसरे पार्टनर ने आत्महत्या कर ली। तेलंगाना के एक मामले में, जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने छह आरोपियों के ख़िलाफ़ कार्यवाही रद्द करते हुए यह बात कही। इन आरोपियों में मृत महिला का पार्टनर, उसके माता-पिता, बहन और अन्य लोग शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे पता चले कि आरोपियों का इरादा महिला को आत्महत्या के लिए मजबूर करना था या उन्हें यह पता था कि शादी से इनकार करने पर वह अपनी जान दे देगी। बेंच ने कहा कि हालातों पर लोग अलग-अलग तरह से प्रतिक्रिया देते हैं, और अगर किसी ब्रेकअप के बाद कोई आत्महत्या कर लेता है, तो इसे हमेशा आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता।