Guru Gobind Singh Jayanti 2026: देश-धर्म के लिए दिया था सर्वोच्च बलिदान, जानें गुरु गोबिंद सिंह की कहानी

By अनन्या मिश्रा | Jan 06, 2026

गुरु गोबिंद सिंह जी सिख धर्म के 10वें गुरु थे। गोबिंद सिंह ने खुद योद्धाओं की एक सेना का गठन किया था। जिसको बपतिस्मा दिया गया था और वह अनुशासित जीवन जीने के लिए समर्पित थे। गुरु गोबिंद सिंह ने और उनकी खालसा सेना ने सिखों को धार्मिक और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए मुगल शासकों के खिलाफ विद्रोह करने और लड़ने के लिए प्रेरित किया था। हर बार साल में दो बार गुरु गोबिंद सिंह की जयंती मनाई जाती है, इस बार आज यानी की 06 जनवरी को गुरु गोबिंद सिंह की जयंती मनाई जा रही है।


जन्म

पौष माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को 1723 में गुरु गोबिंद सिंह का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम गुरु तेग बहादुर और मां का नाम गुजरी था। गुरु गोबिंद सिंह ने संस्कृत, फारसी, पंजाबी भाषाओं के ज्ञान के अलावा तलवारबाजी और विभिन्न हथियारों का प्रशिक्षण प्राप्त किया था।


गुरु गोबिंद सिंह की शिक्षा

गुरु गोबिंद सिंह ने लोगों को पांच काकरों के महत्व के बारे में समझाया था। यह पंच काकर- केश, कंघा, किरपान/कृपाण और कच्चेरा है। उन्होंने खालसा पंथ की भी स्थापना की थी। गुरु गोबिंद सिंह की जयंती के मौके पर सिख धर्म के लोग गुरु गोबिंद सिंह की शिक्षाओं को याद करते हैं। गुरु गोबिंद सिंह ने प्रेम, एकता और भाईचारे का संदेश दिया और उन्होंने सिखाया कि व्यक्ति को निडर और ईमानदार होकर सच्चाई और धर्म के रास्ते पर चलना चाहिए।


प्रमुख कार्य

गुरु गोबिंद सिंह ने न्याय और धर्म की स्थापना के लिए मुगलों से कई युद्ध लड़े।

गुरु गोबिंद सिंह ने 'दसम ग्रंथ' की रचना की और इसके अलावा कई काव्य ग्रंथ भी लिखे।

गुरु गोबिंद सिंह ने 'भै काहू को देत नहिं, नहिं भय मानत आन' का उपदेश दिया।

गुरु गोबिंद सिंह ने धर्म और देश के लिए पूरे परिवार सहित बलिदान दिया। इसलिए वह 'सरबंसदानी' भी कहलाए।

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