By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 13, 2020
भागवत ने डिजिटल माध्यम से प्रो. राजेन्द्र गुप्ता की दो पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए दुनिया को एक बाजार की बजाए एक परिवार समझने और आत्मनिर्भरता के साथ सद्भावनापूर्ण सहयोग की जरूरत को रेखांकित किया। भाजपा नीत राजग सरकार के आत्मनिर्भर भारत अभियान का समर्थन करते हुए सरसंघचालक ने कहा कि स्वदेशी का अर्थ देशी उत्पादों और प्रौद्योगिकी को प्राथमिकता देना है लेकिन इसका मतलब सभी विदेशी उत्पादों का बहिष्कार नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल ऐसी प्रौद्योगिकी या सामग्रियों का आयात किया जाए जिसकी देश में पारंपरिक रूप से कमी है या स्थानीय स्तर पर उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा , ‘‘हमें इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि हमारे पास विदेश से क्या आता है, और यदि हम ऐसा करते हैं तो हमें अपनी शर्तों पर करना चाहिए। ’’ उन्होंने कहा कि विदेशों में जो कुछ है, जरूरी नहीं कि उन सभी का बहिष्कार करना है लेकिन अपनी शर्तो पर लेना है। भागवत ने कहा कि ज्ञान के बारे में दुनिया से अच्छे विचार आने चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने लोगों, अपने ज्ञान, अपनी क्षमता पर विश्वास रखने वाला समाज, व्यवस्था और शासन चाहिए।