By Ankit Jaiswal | Jan 23, 2026
टी20 विश्व कप को लेकर दक्षिण एशियाई क्रिकेट में सियासी बयानबाज़ी तेज होती दिख रही है। इसी कड़ी में 1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य और पूर्व भारतीय तेज़ गेंदबाज़ मदन लाल ने बांग्लादेश के टूर्नामेंट से हटने की आशंका पर पाकिस्तान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है।
बता दें कि भारत और श्रीलंका में 7 फरवरी से 8 मार्च तक होने वाले पुरुष टी20 विश्व कप से पहले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम ने पुष्टि की है कि उनकी टीम भारत नहीं आएगी। उन्होंने साफ किया है कि बांग्लादेश तभी टूर्नामेंट में हिस्सा लेगा, जब उसके ग्रुप सी के सभी मुकाबले श्रीलंका में कराए जाएं हैं।
गौरतलब है कि बांग्लादेश ग्रुप सी में इंग्लैंड, नेपाल, इटली और वेस्टइंडीज के साथ शामिल है। मौजूदा हालात में अगर टीम टूर्नामेंट से बाहर होती है, तो उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया जा सकता है। आईसीसी पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि तय कार्यक्रम में किसी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा, जबकि बांग्लादेश बोर्ड ने विश्व क्रिकेट संस्था से दोबारा बातचीत की बात कही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस पूरे विवाद के बीच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड भी चर्चा में आ गया है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पीसीबी बांग्लादेश के रुख के समर्थन में खड़ा है। पाकिस्तानी मीडिया में यह भी कहा गया कि पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नक़वी ने अंतिम फैसले तक टीम की तैयारियों पर रोक लगा दी है।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मदन लाल ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि बांग्लादेश को उकसाने के पीछे पाकिस्तान की मंशा भारत को नीचा दिखाने की है। मदन लाल के मुताबिक, इस फैसले से भारत को कोई नुकसान नहीं होगा, बल्कि सबसे बड़ा घाटा बांग्लादेश को ही उठाना पड़ेगा, खासकर व्यावसायिक और क्रिकेटिंग दृष्टि से हैं।
मदन लाल ने यह भी कहा है कि तय कार्यक्रम के अनुसार बांग्लादेश के तीन मैच कोलकाता और एक मैच मुंबई में होने हैं। उनका मानना है कि मुंबई देश के सबसे सुरक्षित शहरों में से एक है और सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे सवालों में कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने पूरे विवाद को राजनीति से प्रेरित बताया है।
वहीं, बांग्लादेश में मीडिया से बात करते हुए बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम और सरकार के खेल सलाहकार आसिफ नज़रुल ने कहा है कि भारत में टीम की सुरक्षा को लेकर वास्तविक चिंताएं हैं। उनका आरोप है कि बीसीसीआई और आईसीसी ने इन आशंकाओं को दूर करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं।
फिलहाल, आईसीसी और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड के बीच बातचीत का अगला दौर अहम माना जा रहा है। इस फैसले का असर न सिर्फ टूर्नामेंट की संरचना पर पड़ेगा, बल्कि एशियाई क्रिकेट की राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव छोड़ सकता है।