धोनी का टीम इंडिया के साथ जुड़ना जीत की गारंटी से कम नहीं, आंकड़े बता रहे माही क्यों हैं महत्वपूर्ण

By अनुराग गुप्ता | Oct 21, 2021

दुबई। चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) को चौथी बार इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का खिताब दिलाने के बाद महेंद्र सिंह धोनी ने अब टी20 विश्व कप में भारतीय टीम के लिए रणनीतियां बनाना शुरू कर दिया है। धोनी भारतीय टीम के न सिर्फ मेंटर हैं बल्कि वो खिलाड़ियों के अच्छे दोस्त, गुरू और प्रेरणास्त्रोत हैं। अभ्यास मुकाबले में जहां भारतीय टीम के 11 खिलाड़ी मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के पसीने छुड़ा रहे थे वहीं धोनी मैदान के बाहर विकेटकीपर ऋषभ पंत को गुर सिखा रहे थे। 

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15 साल तक मैदान के भीतर अपना लोहा मनवाने वाले धोनी को मेंटर की भूमिका में देखना काफी दिलचस्प होगा। हालांकि कप्तान विराट कोहली और मुख्य कोच रवि शास्त्री उनका इस्तेमाल कैसे करते हैं यह तो उनकी समझ पर आधारित होगा।

धोनी ने की 200 मुकाबलों की अगुवाई

सफलतम कप्तानों में शुमार धोनी ने 200 एकदिवसीय मुकाबलों में टीम की अगुवाई की। जिसमें से 110 मुकाबलों में टीम को जीत मिली, 74 मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा और 5 मुकाबले ट्राई हुए। सफलतम कप्तानों की सूची में धोनी का तीसरा स्थान है। पहले स्थान पर ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग और दूसरे स्थान पर न्यूजीलैंड के फ्लेमिंग हैं।

2006 में टी20 में पदार्पण करने वाले धोनी ने अबतक 300 मुकाबलों की कप्तानी की। जिसमें आईपीएल के मुकाबले भी शामिल हैं। धोनी ने 300 मैचों में से 177 में जीत दर्ज की जबकि 118 मैच में उन्हें हार मिली।

पाक के खिलाफ 100 फीसदी रहा सकसेज रेट

धोनी उन कप्तानों में भी शामिल हैं, जिनके सामने टी20 विश्व कप में पाकिस्तान जैसी टीम टिक नहीं पाई। पाकिस्तान को सबसे ज्यादा दिक्कत भारतीय टीम में मौजूद धोनी से है। क्योंकि उनकी रणनीति के सामने अभी तक चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान की सभी रणनीतियां विफल साबित हुई हैं।

वनडे विश्व कप की तरह ही टी-20 विश्व कप में भी भारत का पाकिस्तान के खिलाफ 100 फीसदी सकसेस रेट का रिकॉर्ड है। भारत ने टी 20 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ अबतक खेले गए सभी पांचों मुकाबलों में जीत दर्ज की थी। जिसकी अगुवाई धोनी ने की। इन 5 मुकाबलों में से शुरू के दो मुकाबलों ने काफी चर्चा हासिल की।

पाकिस्तान के खिलाफ पहला मुकाबला ट्राई रहा था जिसके बाद 'बॉल आउट' से मैच का फैसला हुआ। इस दौरान भारत के तीनों गेंदबाजों ने विकेट चटकाए, जबकि पाकिस्तान के तीनों गेंदबाज नाकाम रहे। इस मुकाबले में दोनों टीमों के 5-5 गेंदबाजों को विकेट चटकाना था लेकिन पाकिस्तान की टीम नाकाम रही। वहीं दूसरे और टी20 विश्व कप का फाइनल मुकाबले ने सभी की सांसे थाम रखी थी। आखिरी ओवर तक मैच खिंच गया था। धोनी ने जोगिंदर शर्मा को आखिरी ओवर फेंकने के लिए दिया और श्रीसंत के कैच के साथ ही भारत ने अपना पहला टी20 विश्व कप खिताब जीत लिया। 

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आईसीसी मुकाबलों में धोनी की रणनीति रही कारगर

पहली बार धोनी की अगुवाई में भारत ने साल 2007 का टी20 विश्व कप खेला था और फिर वो हुआ जिसकी किसी को भी उम्मीद नहीं थी। भारत ने टी20 विश्व कप का खिताब उठाया। इसके बाद साल 2011 विश्व कप में भी धोनी की रणनीति कारगर साबित हुई उन्होंने विजयी छक्के के साथ श्रीलंका के खिलाफ खेले गए फाइनल मुकाबले को जीत लिया और कपिल देव के बाद विश्व कप खिताब उठाने वाले कप्तान बने। इसलिए धोनी की रणनीति भारतीय खेमे के लिए महत्वपूर्ण हैं। 

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