कानपुर के अनोखे माता मंदिर में मन्नत पूरी करने के लिए चढ़ाये जाते हैं ताले

By कमल सिंघी | Mar 23, 2019

भोपाल। मन्नत पूरी करने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जाते हैं, भारत देश में जितने भी पवित्र स्थान या मंदिर हैं उनमें हर जगह की अपनी अलग ही मान्यता है और उसके ही अनुसार ही वहां चढ़ावा चढ़ाया जाता है। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां मन्नत पूरी करने के लिए ताले चढ़ाने का नियम है। इसी वजह से इनका नाम भी ताले वाली माता पड़ गया है। यह स्थान कानपुर में स्थित है, इस मंदिर में माता काली रूप में विराजमान होती हैं। इनका आकर्षक स्वरूप देखते ही बनता है। यह मंदिर अपनी अनोखी मान्यता के चलते अत्यधिक प्रसिद्ध है।

मंदिर को लेकर प्रचलित है यह अनोखी कथा

कहा जाता है कि बरसों पहले एक महिला काफी परेशान रहती थी, फिर भी नियमानुसार इस मंदिर में माँ की पूजा व दर्शनों के लिए आती थी। एक बार उसे किसी ने मंदिर में ताला लगाते हुए देखा, इसका कारण पूछने पर उसने कहा, माता ने उसे स्वप्न में दर्शन देकर ऐसा करने के लिए कहा है। उसने बताया कि ऐसा करने से उसके सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। इसके बाद ताला लगाकर वह कई सालों तक दिखाई नहीं दी। कुछ सालों बाद मंदिर से ताला गायब था और कहा जाता है कि मंदिर की दीवार पर लिखा था मन्नत पूरी हो गई इसलिए मैं ताला खोलकर ले जा रही हूं।

कोई लगाने आता है कोई खोलने

मंदिर में ताला लगाने को लेकर मान्यता है कि ताला लगाने से पहले विधि-विधान से माता की पूजा की जाती है और प्रार्थना की जाती है कि उसकी मन्नत पूरी हो जाए। ऐसा करने हजारों लोग यहां आते हैं। कुछ ताला लगाने आते हैं तो कुछ ताला खोलने। सैंकड़ों ताले हर समय आप यहां देख सकते हैं। क्षेत्रीय लोगों की इस स्थान को लेकर बहुत आस्था है और अब तो अपने चमत्कारों के चलते इसकी ख्याति दूर-दूर तक फैल चुकी है।

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जल्दी ही ताला खोलने लौटते हैं भक्त

यह मंदिर कब बनाया गया इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। किसने इसे बनवाया इस संबंध में भी कुछ स्पष्ट नहीं है। यह कितने सालों पुराना है, इसके बारे में भी कोई नहीं बता पाता। यहां तक कि मंदिर में बरसों से माता काली की सेवा कर रहे पुजारी भी इस बात से अनभिज्ञ हैं। मंदिर को लेकर लोगों की आस्था इतनी है कि हर उम्र और वर्ग के लोगों को यहां आकर ताला लगाते और खोलते देखा जा सकता है। ऐसा भी कहा जाता है कि ताले वाली माता अपने भक्तों को ज्यादा इंतजार नहीं करातीं और भक्त जल्दी ही मंदिर पुनः ताला खोलने के लिए लौटते हैं।

- कमल सिंघी

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