बड़ी रोचक है राजस्थान के सास-बहू मंदिर की कहानी, सुनकर हैरान रह जाएंगे

By सुषमा तिवारी | Publish Date: Mar 16 2019 2:32PM
बड़ी रोचक है राजस्थान के सास-बहू मंदिर की कहानी, सुनकर हैरान रह जाएंगे
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सास-बहू मंदिर को दो संरचनाओं में बनाया गया है। उनमें से एक सास द्वारा और एक बहू के द्वारा बनाया गया है। मंदिर के प्रवेश द्वार नक्काशीदार छत और बीच में कई खाँचों वाली मेहराब हैं। एक वेदी, एक मंडप (स्तंभ प्रार्थना हॉल), और एक पोर्च मंदिर के दोनों संरचनाओं की सामान्य विशेषताएं हैं।

भारत एक ऐसा देश है जहां पर हर जाति, वर्ग, संप्रदाय और हर संस्कृति के लोग मिलते हैं। इसी लिए हर देवी-देवता के पूजा स्थल भी आपको यहां देखने को मिलेंगे। नदी, पानी, आकाश, पेड़, झरना, धरती, सूरज, चंद्रमा हर चीज की पूजा की जाती है। इसी कारण भारत में हर भगवान के मंदिर हैं। उन्हीं मंदिरों में से एक है राजस्थान के उदयपुर से 23 किमी दूर नागदा गांव में स्थित सास-बहू मंदिर। जो भगवान विष्णु को समर्पित है।
 
सास-बहू मंदिर जैसा की नाम से ही अनोखा है उसी तरह इस मंदिर की खासियत भी अनोखी है। आइये जानते है भगवान विष्णु के इस खास मंदिर की अनोखी खासियत-
मंदिर की सास- बहू के रूप में संरचना
इस पूरे मंदिर को दो संरचनाओं में बनाया गया है। उनमें से एक सास द्वारा और एक बहू के द्वारा बनाया गया है। मंदिर के प्रवेश द्वार नक्काशीदार छत और बीच में कई खाँचों वाली मेहराब हैं। एक वेदी, एक मंडप (स्तंभ प्रार्थना हॉल), और एक पोर्च मंदिर के दोनों संरचनाओं की सामान्य विशेषताएं हैं।



सहस्‍त्रबाहू  से बना सास-बहू मंदिर
10 वी शताब्दी के कच्छवाहा वंश के राजा महिपाल के द्वारा बनवाये गये इस मंदिर को सहस्‍त्रबाहू के नाम से जाना जाता है। सहस्‍त्रबाहू का मतलब होता है हजार भुजाओं वाला। यहा भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। सहस्‍त्रबाहू नाम का लोग सही से उच्चारण नहीं कर पाते थे इस लिए धीरे-धीरे इस मंदिर का नाम सास-बहू मंदिर पड़ गया।
मुगलों ने बंद करवाया अंग्रेजों ने खुलवाया
इस मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो कहा इतिहासकारों का मानना है कि भारत में मुगल आये थे तो मुगलों ने सास-बहू मंदिर को चूने और रेत से ढकवा दिया था और पूरे मंदिर के परिसर पर अपना राज जमा लिया था। मंदिर के अंदर विष्णु भगवान के अलावा शिवा सहित कई पूजनीय भगवान की मूर्तियां थी जिसे मुगलों ने खंडित कर दिया था। जिसके बाद से इस मंदिर का आकार रेत के पहाड़ की तरह लगने लगा। मुगलों के बाद भारत में अंग्रेज आये और पूरे देश पर कब्जा कर दिया तब इस मंदिर को वापस खुलवाया गया आम लोगों के लिए।
 
- सुषमा तिवारी

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