By अनन्या मिश्रा | Mar 13, 2026
कई लोगों को बाथरूम में फोन लेकर जाने की आदत होती है। अगर आप भी बाथरूम में फोन लेकर जाते हैं, तो यह आदत सिर्फ ज्योतिष ही नहीं बल्कि आपकी लाइफस्टाइल और ग्रहों और खासकर राहु पर भी प्रभाव डालती है। बाथरूम जैसी जगहों पर फोन लेकर जाना राहु को अशांत करता है। जिससे जातक का फोकस, निर्णय लेने की क्षमता, मानसिक एनर्जी और जीवन में स्थिरता पर निगेटिव असर पड़ता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि ज्योतिष के मुताबिक बाथरूम में फोन लेकर क्यों नहीं जाना चाहिए।
वैदिक शास्त्रों में बाथरूम को तामसिक और अशुद्ध स्थान माना गया है। बाथरूम में निगेटिव एनर्जी ज्यादा होती है। क्योंकि शरीर की गंदगी और भारी एनर्जी निकलती है। जब आप इस तरह के स्थान पर फोन लेकर जाते हैं, जो सूचना, ज्ञान और मानसिक एनर्जी से जुड़ा उपकरण है। तब माना जाता है कि वह भी उसी निगेटिव एनर्जी से प्रभावित होता है। इसलिए यह सिर्फ साफ-सफाई नहीं बल्कि ऊर्जा ता भी मामला है।
राहु को मन, भ्रम और डिजिटल माध्यमों से जुड़ी ऊर्जा का कारक माना जाता है। राहु सोशल मीडिया, इंटरनेट, आभासी जगह, स्क्रीन और सूचना-व्यसन का प्रतीक होता है। जब कोई बाथरूम जैसे तामसिक स्थान में मोबाइल लेकर आता है और वहां पर समय बिताता है। तो दो विरोधी एनर्जी का मिश्रण होता है।
बाथरूम की तामसिक ऊर्जा और मोबाइल का डिजिटल प्रभाव राहु के तत्व को असंतुलित कर देता है। जिससे मन में चिंता, भ्रम, अनावश्यक चिंता, निगेटिव एनर्जी, देर करने की आदत और ध्यान भटकने की प्रवृत्तियां बढ़ती हैं। यह आदतें व्यक्ति को धीरे-धीरे प्रतिक्रियाशील, निर्णयहीन और बेचैन बना सकती हैं। यह राहु के दूषित प्रभाव को स्पष्ट संकेत है।
बाथरूम में फोन ले जाने की आदत शरीर और मानसिक सेहत के लिए भी ठीक नहीं है।
लंबे समय तक कमोड में बैठने से डाइजेशन पर बुरा असर पड़ता है।
फोन पर बैक्टीरिया, गंदगी और नमी जमा होती है।
फोन ले जाने से दिमाग लगातार स्क्रीन और टॉयलेट एनर्जी के बीच उलझा रहता है।
इससे टालमटोल और स्क्रीन-एडिक्शन बढ़ता है।
बता दें कि जब शरीर और मन असंतुलित होता है, तो राहु की ऊर्जा स्वत: असंतुलित होती है। क्योंकि राहु का सीधा संबंध मन, तंत्रिका तंत्र और व्यवहार से है। इस तरह से आधुनिक विज्ञान भी इस बात को मानता है कि यह आदत जीवन की गुणवत्ता को कम करती है।
ज्योतिष के मुताबिक बाथरूम सिर्फ शरीर को साफ करने की जगह है। यह सोच, पढ़ाई, ध्यान या मोबाइल पर समय बिताने की जगह नहीं है। अगर जातक इस अनुशासन का पालन करता है और फोन को बाथरूम से दूर रखता है, तो निर्णय लेने की क्षमता, मानसिक स्पष्टता और विचारों में स्थिरता बढ़ती है।
सुबह के समय 10-15 मिनट डिजिटल फ्री शुरूआत करें।
फोन को बाथरूम में ले जाना बंद करें।
टॉयलेट टाइम कम रखें।
राहु को शांत करने के लिए प्राणायाम, ध्यान और साफ दिनचर्या अपनाएं।
इन कामों को करने से मन शांत होता है, राहु की ऊर्जा स्थिर होती है, जीवन में स्पष्टता आती है और फोकस बढ़ता है।