By अभिनय आकाश | Jun 29, 2026
बुजुर्गों ने एक बड़े पते की बात कही थी कि आस्तीन में सांप पालोगे तो डसने का डर हमेशा रहेगा। आज पाकिस्तान ने दशकों तक जिस उग्रवाद और कट्टरपंथ को अपनी रणनीतिक बढ़त के लिए इस्तेमाल किया आज वही सांप पाकिस्तान की रियासत को डस रहा है। और जब पाकिस्तान ने इन सांपों को कुचलने के लिए अफगानिस्तान की सरजमी पर बमबारी की एयर स्ट्राइक की तो उसने एक ऐसे भैया तालिबान को जगा दिया जो पीछे हटने वालों में से नहीं है। पाकिस्तानी एयरफोर्स के जेट्स ने रविवार की काली रात में जो आग बरसाई उसमें 35 बेगुनाह जिंदगियां खाक हो गई अफगानिस्तान की और तालिबान का गुस्सा सातवें आसमान पर है और असीम मुनीर की सेना अब सीधे निशाने पर है। दरअसल रविवार की रात जब लोग सो रहे थे तब आसमान से पाकिस्तानी विमानों ने मौत का सामान गिराया। यह हमले अफगानिस्तान के बख्तियागा प्रांत के गयान और समकानी जिले और कुनार प्रांत के मरवारा जिले को निशाना बनाया गया।
दरअसल पाकिस्तान का दावा है कि उन्होंने टीटीपी यानी कि तहरीक तालिबान पाकिस्तान के ठिकानों पर प्रहार किया है और 29 खूंखार लड़ाकों को मार खिलाया। अब पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने इसे कराची में पैरामिलिट्री रेंजर्स पर हुए हमले का प्रतिशोध बताया। लेकिन यहां एक बड़ा विरोधाभास है। पाकिस्तान कहता है कि आतंकी मारे गए। अफगानिस्तान कहता है कि आम नागरिक मारे गए और हकीकत यह है कि जब हवाई हमले होते हैं तो अक्सर कोलटरल डैमेज के नाम पर बेगुनाह की बलि चढ़ती है और यही वो बिंदु है जहां से नफरत की नई फसल पैदा होती है। पाकिस्तान पिछले साल अक्टूबर से लगातार सीमा पार हमले कर रहा है। लेकिन क्या इससे टीटीपी खत्म हुई? जवाब है नहीं। टीटीपी के हमले पाकिस्तान के भीतर और ज्यादा बढ़ गए हैं।