विकास की राजनीति की बातें (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | May 24, 2024

कुछ दिनों के लिए फिर चर्चा हो रही है कि चारों दिशाओं का विकास करने के सच्चे वायदों की बारिश में कई चुनाव बह गए लेकिन पर्यावरण मुद्दा नहीं बना। चौराहों पर मूर्तियां सज रही हैं। स्थानीय नेताजी के निकट संबंधी विकासजी ने सड़क में डिवाइडर बनवा दिया है जो जनता की सुविधा के लिए था लेकिन जनता और पुलिस परेशान होने लगी है। उखड़ी हुई सड़क पर ईमानदारी की बजरी और तारकोल डाला गया है। किनारे लगे कुछ पेड़ विकासजी की सेना ने उखाड़ दिए कुछ बिजली की तार में उलझ कर मर गए। 


कमेटी वाले आदतानुसार सीवरेज डालना भूल गए। बजटजी को आदर सहित फिर लाया गया, उन्होंने मेहनत कर सड़क को फिर खोदवाया, लेकिन काम ज़्यादा बजट कम होने के कारण बिजली के पोल लगने रह गए। जैसे कैसे बजटजी को फिर पकड़ा, पोल रातों रात लगा दिए लेकिन जल्दी के अंधेरे में कुछ पोल टेढ़े लग गए, कई तारें यहां वहां लटकी हैं।

 

लोकप्रिय नेताजी ने कहा, काम करने का तरीका सुधर रहा है और हम विकास की राजनीति करते हैं, वोटों की नहीं। स्वच्छता जैसे पवित्र विचार पर बहस नहीं करते। गंगा को हमने मां माना है उन पर हम गंदी राजनीति क्यूं करें। इंसान तो छोड़ो, हम तो जानवरों को बचाने के लिए कितने ईमानदार प्रयास करते हैं। इन प्रयासों का न्यूज़ विद फोटो छपवाते हैं ताकि दूसरों को प्रेरणा मिले। जानवरों की जान बचाने के लिए हमने सख्त से सख्त कानून बना दिए हैं जिन्हें ईमानदारी से लागू किया गया है। 

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हमने समाज को हमेशा महापुरुष नायकों के बताए रास्ते पर चलने के लिए प्रोत्साहित किया और हम उनके बताए गए रास्तों पर राजनीति नहीं करते। हम देश के बुद्धिजीवियों द्वारा जगाई गई सामाजिक चेतना की कद्र करते हैं। हारे हुए विरोधी नेता अपने आप को धरतीपुत्र कहते हैं, जिन्होंने हमेशा बेरोजगारी, पेयजल, सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य संस्थानों समेत मूलभूत इंसानी सुविधाओं पर राजनीति की। इन्होंने सही ढंग से कभी राजनीति नहीं की, दरअसल इन्हें राजनीति करनी ही नहीं आती। राजनीति तो हमें आती है तभी तो जनता ने हमें जिताया था और हमने बढ़िया सरकार बनाई भी और चलाई भी। 


हमने जाति पर राजनीति कभी नहीं की। हम सिर्फ उदघाटन पट्ट लगवाने की राजनीति नहीं करते बल्कि जहां इन्होंने अपने नाम के महंगे पट्ट लगवाए वो काम भी हमने पूरे करवाए। यही तो है हमारी काम करवाने की राजनीति। इन्हें तो यह भी समझ नहीं आता कि हमने अपने प्रयासों से धर्म को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। हम ध्रुवीकरण की राजनीति तो कतई नहीं करते। हमें पता है ऐसा करना देश के लिए खतरनाक होता है। हमें ऐसा करने की ज़रूरत भी क्या है। हमारे विराट विचार, चमकते सच, राष्ट्रप्रेम, मानवप्रेम व धर्म निरपेक्षता से ओतप्रेत हैं। यही तो हमारी विकासपरक सफल राजनीति है। 


- संतोष उत्सुक

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