2030 तक 300 अरब डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य, भारत में बायोटेक बनेगा विकास का इंजन

By नीरज कुमार दुबे | Aug 27, 2025

भारत ने पिछले एक दशक में जिस तेजी से बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र में प्रगति की है, वह न केवल विज्ञान एवं तकनीक की सफलता का प्रतीक है, बल्कि देश की आर्थिक और सामाजिक संरचना को भी गहराई से प्रभावित करने वाला परिवर्तन है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा घोषित यह तथ्य कि भारत की बायोइकोनॉमी वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर (लगभग 25 लाख करोड़ रुपये) को छू लेगी, इस दिशा में नए युग की शुरुआत का संकेत देता है।

इसे भी पढ़ें: भारत और फिजी के बीच साझेदारी गहराने से इंडो-पैसिफिक में चीन की पकड़ पड़ी ढीली

इस नीति की सबसे उल्लेखनीय पहल है BioE3 Youth Challenge, जो छात्रों, शोधार्थियों और स्टार्टअप्स को स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण और उद्योग की चुनौतियों के लिए ‘सुरक्षित और टिकाऊ जैविक समाधान’ तैयार करने के लिए आमंत्रित करता है। इसके तहत हर महीने 10 विजेताओं को ₹1 लाख का पुरस्कार और मार्गदर्शन मिलेगा। साथ ही चुने गए 100 नवाचारों को ₹25 लाख तक का अनुदान और BIRAC के माध्यम से प्रूफ-ऑफ़-कॉन्सेप्ट विकसित करने का अवसर मिलेगा। देखा जाये तो यह कदम युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं बल्कि नवाचार और रोजगार सृजन का वाहक बनाएगा।

हम आपको बता दें कि बायोटेक्नोलॉजी का दायरा अब पृथ्वी तक सीमित नहीं है। DBT और ISRO के बीच समझौता स्पेस बायोटेक्नोलॉजी की दिशा में भारत की महत्वाकांक्षा को दर्शाता है। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर किए गए प्रयोग इस क्षेत्र को भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं और मानव अस्तित्व की नई संभावनाओं से जोड़ते हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, बायोइकोनॉमी केवल आर्थिक विकास का साधन नहीं, बल्कि पर्यावरणीय स्थिरता का भी आधार है। जैव-आधारित समाधान न केवल रोजगार पैदा करेंगे बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने, स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और स्वास्थ्य सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

इसके अलावा, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने सही कहा है कि अब जीवविज्ञान कोई अलग-थलग अनुशासन नहीं रहा। यह इंजीनियरिंग, वास्तुकला और अंतरिक्ष विज्ञान के साथ मिलकर नई संभावनाएँ खोल रहा है। जैसे- जैव-अनुकूल शहरी डिज़ाइन, शैवाल-आधारित कार्बन कैप्चर, अंग-प्रतिरूपण (Prosthetic Organs) और ऑर्गन-ऑन-ए-चिप, बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक और स्पेस बायोलॉजी प्रयोग। यह संगम भारत की ‘ग्रीन, क्लीन और प्रॉस्पेरस’ (हरित, स्वच्छ और समृद्ध) राष्ट्र की परिकल्पना को साकार करने में सहायक होगा।

बहरहाल, भारत की बायोइकोनॉमी की यात्रा यह दर्शाती है कि विज्ञान और नीति का संगम कैसे आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन को एक साथ आगे बढ़ा सकता है। BioE3 नीति ने देश को केवल अनुसंधान आधारित राष्ट्र नहीं, बल्कि नवाचार और जैव-निर्माण की वैश्विक शक्ति बनने की राह पर ला खड़ा किया है। 2030 तक 300 अरब डॉलर की बायोइकोनॉमी का लक्ष्य केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और विश्वगुरु भारत की दिशा में एक ठोस कदम है।

प्रमुख खबरें

टीम इंडिया का घरेलू सीजन का फुल शेड्यूल, ऑस्ट्रेलिया समेत इन देशों के खिलाफ 17 शहरों में 22 मुकाबले

Hair Care: अब Chemical Free तरीके से पाएं काले बाल, ये देसी नुस्खा रोकेगा Hair Fall, बढ़ाएगा ग्रोथ

Iran-Israel War के बीच बोले CM Yogi- दुनिया में अराजकता, PM Modi के राज में भारत सुरक्षित

Petrol-Diesel Shortage की क्या है सच्चाई? सरकार ने कहा- Stock पूरी तरह सुरक्षित, Panic Buying न करें