Tata Sons चेयरमैन पद की दौड़ में Narendran, Saurabh Agrawal और Ashish Chauhan के नाम

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 05, 2026

(अम्मार जैदी) नयी दिल्ली, पांच सितंबर टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी की तलाश तेज कर दी है और इसके लिए तीन प्रमुख कॉरपोरेट दिग्गजों -टाटा स्टील के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) टी वी नरेंद्रन, टाटा संस के कार्यकारी निदेशक एवं समूह सीएफओ सौरभ अग्रवाल, और एनएसई के एमडी एवं सीईओ आशीष चौहान के नाम उभरकर सामने आए हैं। मामले से परिचित लोगों ने यह जानकारी दी। सूत्रों के अनुसार, जहां आंतरिक उम्मीदवारों में नरेंद्रन सबसे आगे चल रहे हैं, वहीं अग्रवाल भी अपने निवेश बैंकिंग और पूंजी आवंटन अनुभव के साथ दौड़ में बने हुए हैं।

सूत्रों ने कहा कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने छांटे गए उम्मीदवारों के नाम शीर्ष सरकारी नेतृत्व को बता दिए हैं और नामों पर गहन विचार-विमर्श के बाद फैसला होने की संभावना है। टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस ने इस बारे में टिप्पणी के लिए भेजे गए ईमेल का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। चंद्रशेखरन, जिन्होंने 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था और वर्तमान में अपना दूसरा पांच साल का कार्यकाल पूरा कर रहे हैं, ने पिछले महीने घोषणा की थी कि 20 फरवरी 2027 को कार्यकाल समाप्त होने पर वह पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे।

हालांकि उत्तराधिकारी खोजने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन आधिकारिक तौर पर किसी छांटे गए नाम की पुष्टि नहीं की गई है। सामने आए अन्य नामों में स्वयं नोएल टाटा भी शामिल हैं, जो समिति द्वारा समय पर प्रक्रिया पूरी न कर पाने की स्थिति में अंतरिम चेयरमैन के रूप में कार्य कर सकते हैं। इनके अलावा टाटा संस की समूह मुख्य डिजिटल अधिकारी आरती सुब्रमण्यन, टाटा मोटर्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शैलेश चंद्र और टाटा पावर के सीईओ प्रवीर सिन्हा के नाम भी चर्चा में आए हैं।

मामले से परिचित लोगों के अनुसार चौहान एक चौंकाने वाली पसंद हो सकते हैं। नरेंद्रन अपने साथ टाटा का लंबा अनुभव लाते हैं और शीर्ष पद के लिए स्वाभाविक आंतरिक दावेदार माने जा रहे हैं, लेकिन उनका करियर लगभग पूरी तरह से टाटा स्टील के भीतर रहा है, और होल्डिंग-कंपनी स्तर तथा पूंजी आवंटन में उनका अनुभव अपेक्षाकृत कम है। दूसरी ओर, चौहान का प्रोफाइल बिल्कुल अलग है।

एनएसई प्रमुख के पास प्रौद्योगिकी, पूंजी बाजार, वित्तीय सेवाओं और संस्था निर्माण का गहरा अनुभव है। वह 1990 के दशक में एनएसई की स्थापना में मदद करने वाले अधिकारियों में शामिल थे और बाद में 2022 में एनएसई प्रमुख के रूप में लौटने से पहले उन्होंने बंबई शेयर बाजार (बीएसई) के एमडी और सीईओ के रूप में कार्य किया। आईआईटी मुंबई से स्नातक और आईआईएम कलकत्ता से स्नातकोत्तर प्रबंधन की डिग्री रखने वाले चौहान ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईडीबीआई बैंक में भी काम किया है।

वर्तमान में वह एनएसई के 30,000 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) का नेतृत्व कर रहे हैं, जो अब तक के भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। इसके साथ ही एनएसई का मूल्यांकन लगभग पांच लाख करोड़ रुपये हो जाएगा और यह बाजार पूंजीकरण के हिसाब से 10 सबसे मूल्यवान भारतीय कंपनियों में शामिल हो जाएगी। सूत्रों का कहना है कि उनकी उम्मीदवारी टाटा समूह को पूरी तरह से अनजान चेहरा लाए बिना एक बाहरी विकल्प प्रदान कर सकती है।

चौहान पूंजी बाजार और बड़े संस्थानों के प्रौद्योगिकी-संचालित बदलाव को समझते हैं, जबकि उनका अनुभव कॉरपोरेट प्रबंधन, वित्त और प्रौद्योगिकी तक फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि वह भारत के नियामक और नीतिगत परिवेश से भी भली-भांति परिचित हैं, जो एक ऐसा गुण है जो समूह द्वारा अत्यधिक विनियमित क्षेत्रों में विस्तार करने के दौरान उपयोगी हो सकता है। हालांकि, टाटा संस की चेयरमैनशिप विशेष रूप से एक चुनौतीपूर्ण भूमिका है।

चौहान को पूंजी बाजारों की विशिष्ट और अत्यधिक विनियमित दुनिया से निकलकर 30 से अधिक व्यवसायों और 10 लाख से अधिक कर्मचारियों वाले समूह की निगरानी का जिम्मा संभालना होगा। नरेंद्रन शुरुआती दौर में सबसे चर्चित नाम रहे हैं और सबसे मजबूत आंतरिक उम्मीदवार बने हुए हैं। उन्होंने 1988 से समूह के साथ तीन दशक से अधिक समय बिताया है और एक दशक से अधिक समय से टाटा स्टील का नेतृत्व सीईओ और एमडी के रूप में कर रहे हैं।

उन्होंने टाटा स्टील को अस्थिर वैश्विक जिंस चक्रों, भारी पूंजीगत व्यय और कठिन यूरोपीय परिचालनों के दौर से बाहर निकाला है, जो टाटा संस के पूर्व चेयरमैनों के लिए भी एक चुनौती थी। नरेंद्रन के लिए चुनौती टाटा की एक बड़ी परिचालन आधारित कंपनी चलाने के अपने अनुभव को आईटी और ऑटोमोबाइल से लेकर विमानन, उपभोक्ता व्यवसाय और नए जमाने के विनिर्माण तक फैले विशाल पोर्टफोलियो के प्रबंधन में बदलने की होगी। अग्रवाल स्पष्ट रूप से वित्त और रणनीति आधारित आंतरिक विकल्प का प्रतिनिधित्व करते हैं।

वह 2017 में चंद्रशेखरन के तहत समूह सीएफओ के रूप में टाटा संस में शामिल हुए थे और वर्तमान में कार्यकारी निदेशक और समूह सीएफओ के रूप में कार्यरत हैं। उनकी जिम्मेदारियां एक पारंपरिक सीएफओ से कहीं आगे तक फैली हुई हैं, जिसमें पूंजी आवंटन, निवेश-प्रबंधन निर्णय और पूरे समूह में पोर्टफोलियो का अनुकूलन शामिल है। उनकी उम्मीदवारी विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाती है क्योंकि टाटा संस भारी पूंजी आवश्यकताओं के दौर का सामना कर रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल नरेंद्रन सबसे मजबूत आंतरिक उम्मीदवार बने हुए हैं, जबकि अग्रवाल वित्त केंद्रित विकल्प प्रदान कर रहे हैं। दूसरी ओर प्रौद्योगिकी, वित्तीय-बाजार विशेषज्ञता और संस्थागत नेतृत्व का चौहान का अनुभव, उन्हें एक अप्रत्याशित दावेदार बनाता है। चयन समिति द्वारा आने वाले महीनों में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

नए चेयरमैन को फरवरी 2027 में चंद्रशेखरन का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कार्यभार संभालना होगा।

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