By Ankit Jaiswal | Aug 03, 2026
भारत को वैश्विक निवेश प्रबंधन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एलिजिबल निवेश फंड से जुड़े नियमों को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा है, जिससे विदेशों के निवेश फंड के लिए भारत से संचालन करना पहले की तुलना में अधिक सरल हो सकता है। माना जा रहा है कि इससे देश में विदेशी पूंजी आकर्षित करने और निवेश गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
गौरतलब है कि यह विधेयक संसद सदस्यों के बीच वितरित किया जा चुका है और जल्द ही केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इसे लोकसभा में पेश कर सकती हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र में संचालित निवेश फंड के लिए अलग से लागू छूट संबंधी नियमों को भी समाप्त करने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य देश के भीतर संचालित सभी विदेशी निवेश फंड के लिए एक समान व्यवस्था लागू करना है।
नांगिया ग्लोबल के विलय एवं अधिग्रहण कर मामलों के भागीदार अभीत सचदेवा का कहना है कि इन बदलावों से भारत का निवेश प्रबंधन तंत्र अधिक आकर्षक बनेगा और विदेशों में संचालित कई निवेश प्रबंधन गतिविधियां भारत की ओर ट्रांसफर हो सकती हैं।
बता दें कि सरकार ने जून में एक अध्यादेश के जरिए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से मिलने वाली ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट दी थी। अब उसी व्यवस्था को इस विधेयक के माध्यम से कानून का रूप देने का प्रस्ताव रखा गया है। सरकार का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच विदेशी पूंजी को आकर्षित करना जरूरी है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पहले भी कह चुकी हैं कि विदेशी निवेश बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए आगे भी नए कदम उठाए जा सकते हैं। इसी दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा गैर निवासी जमा से जुड़ी अदला-बदली सुविधा को सितंबर तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को विदेशी वाणिज्यिक ऋण जुटाने के लिए भी विशेष सुविधा दी गई है।
ग्रांट थॉर्नटन भारत की कर विशेषज्ञ ऋचा साहनी का कहना है कि यह विधेयक केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को लंबे समय तक निवेश के लिए प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद गंतव्य बनाने की रणनीति का हिस्सा है। गौरतलब है कि जुलाई के अंत तक इन उपायों के बाद देश में 40.81 अरब डॉलर का शुद्ध विदेशी निवेश आया, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार भी बढ़कर 682.354 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये प्रस्ताव लागू होते हैं तो भारत वैश्विक निवेश प्रबंधन क्षेत्र में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।