तकनीक बन रही है जनकल्याण का माध्यम

By डॉ. सुबोध अग्रवाल | Jul 24, 2025

एक बात साफ हो जानी चाहिए कि तकनीक मात्र उपकरण बनें तो यह मानवता के हित में नहीं हो सकती। ऐसे में तकनीक को जनकल्याण का माध्यम बनाना होगा। डिजिटल युग में बहुत कुछ बदला है। हमारे सोच का तरीका बदला है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में आज सामान्य मानव मन से भी अधिक तेजी से तकनीक काम करने लगी है। तकनीक ने इतना विकास कर लिया है कि अब मशीनें सोचने लगी है। हमारे चिंतन और मनन को प्रभावित करने लगी है। इसमें कोई दो राय नहीं कि तकनीक ने जीवन के सभी क्षेत्रों में प्रवेश करने के साथ सहज बनाया है। समय तो यहां तक बदल गया है कि अब पढ़ना-लिखना ही नहीं तकनीक ने सोचना और निकश तक पहुंचना आरंभ कर दिया है। यह विकास का उजला पक्ष होने के साथ ही इसके पीछे छुपा काला पक्ष भी गंभीर है। हांलाकि प्रकृति अपना काम कर रही है और वह लगातार हमें चेतावनी देती जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है। वह हमारे निर्णयों को प्रभावित कर रही है, हमारी प्राथमिकताएं तय कर रही है, और हमारी सोच को प्रभावित कर रही है। इस दौर में हमें ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो तकनीक के चमत्कारों को संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के साथ दिशा दे।

इसे भी पढ़ें: दादी-नानी की कहानियां व लोरियां में छिपा सकारात्मक संदेश

दरअसल तकनीक का उपयोग मानव कल्याण के उद्देश्य से होना चाहिए। सरकारें इस बात को समझती है और यही कारण है कि ई-गवर्नेंस से लेकर डिजिटल शिक्षा, एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं और नागरिक सुविधा केंद्रों तक हर नीति के केंद्र में आम आदमी है, सिस्टम नहीं। राज्यों में तकनीक को ‘डिजिटल एक्सेस’ के बजाय ‘डिजिटल एम्पावरमेंट’ के रूप में उपयोग किया जाने लगा है। और यही बदलाव राज्यों को एक सॉफ्ट-टेक्नोलॉजिकल स्टेट बना रहा है। राज्यों में चल रहे हरित अभियान, जल संरक्षण योजनाएं, सौर ऊर्जा प्रोत्साहन और ईको-टूरिज्म और इसी तरह की अन्य पहल इस सोच के साथ धरातल पर उतर रही हैं। यहां तक कि मानसिक स्वास्थ्य अभियान, डिजिटल डिटॉक्स क्लासेस और संस्कार संवाद जैसे कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। ताकि युवा स्मार्टफोन के स्क्रीन से आगे सोच सकें और अपनी जड़ों से जुड़े रहें।

आज सवाल यह नहीं कि हमें तकनीक से डरना चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि हम तकनीक को किस नैतिक दायरे में संचालित कर सकते हैं। केन्द्र के साथ ही राज्यों की सरकारें इसे समझने लगी है और यह कारण है कि राज्यों द्वारा तकनीक का उपयोग भविष्य की संभावनाओं और जनकल्याण नीतियों के रुप में सामने आ रहा है। 

डॉ. सुबोध अग्रवाल,(आईएएस)

अतिरिक्त मुख्य सचिव, राजस्थान सरकार

लेखक परिचयः-

डॉ. सुबोध अग्रवाल अतिरिक्त मुख्य सचिव, भारतीय प्रशासनिक सेवा के राजस्थान के वरिष्ठतम अधिकारी होने के साथ ही राज्य सरकार के विभिन्न विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और संस्थानों को प्रबंधकीय दक्षता से संचालन का दीर्घकालीन अनुभव है। डॉ. सुबोध अग्रवाल को पब्लिक पालिसी, एडमिनिस्ट्रेशन और क्राइसिस मैनेजमेंट का 36 साल का दीर्घ अनुभव है।

प्रमुख खबरें

ICC T20 World Cup: Shafali Verma का बड़ा बयान, ऑस्ट्रेलिया को हराने का भरोसा, Semifinal पर नजर

Rajnath Singh का बयान अफवाहों का था जवाब, Operation Sindoor पर भ्रम फैलाने वालों को MoD ने दिया करारा जवाब

China के 109 मंजिला बुर्ज खलीफा से टकराया विमान, उड़ गए परखच्चे, Video

TET पेपर लीक पर सियासी घमासान, राहुल गांधी बोले- हर युवा असुरक्षित, ये भविष्य की चोरी है