European Union History Part 2 | कोल से करेंसी तक: ईयू बनने का सफर|Teh Tak

By अभिनय आकाश | Apr 29, 2026

आपने यूरोप या  फिर यूरोपियन यूनियन सुन तो रखा होगा। लेकिन ये यूरोपियन  यूनियन है क्या, समझते हैं की यह यूरोपियन  यूनियन के पीछे की हिस्ट्री क्या है और यह क्यों बनाया गया। उसके बारे में बताते हैं। उसे सिंपल टर्म्स में यूरोप एक कॉन्टिनेंट है, जिसमें र्मनी, नीदरलैंड्स, स्वीटजरलैंड, बेल्जियम जैसे 44 कंट्रीज हैं। द्वितीय विश्व युद्ध की तबाही के बाद यूरोप के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि भविष्य में ऐसे विनाशकारी संघर्ष को रोकना। इसी लक्ष्य के साथ 9 मई 1950 को फ्रांस के विदेश मंत्री रॉबर्ट शूमन ने एक अहम प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने सुझाव दिया कि फ्रांस और पश्चिम जर्मनी अपने कोयला और इस्पात उद्योग को एक साझा प्राधिकरण के तहत लाएं। चूंकि ये संसाधन युद्ध के लिए बुनियादी थे, इसलिए इस कदम का उद्देश्य दोनों देशों के बीच युद्ध को न सिर्फ अकल्पनीय, बल्कि व्यावहारिक रूप से असंभव बनाना था।

ट्रीटी ऑफ रोम और ईसीएससी

ईसीएससी की सफलता के बाद सदस्य देशों ने सहयोग को अन्य क्षेत्रों तक विस्तारित करने का निर्णय लिया। 1957 में Treaties of Rome पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत दो प्रमुख संस्थाएं स्थापित हुईं। पहली, यूरोपीयन यूनियन कम्युनिटी (ईईसी), जिसका उद्देश्य एक कॉमन मार्केट बनाना था, जहां वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और लोगों की आवाजाही बिना बाधा के हो सके। दूसरी, Euratom, जिसे परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया।  आने वाले दशकों में ईईसी ने व्यापार बाधाओं को कम करते हुए अपने दायरे का विस्तार किया और नए सदस्य देशों को शामिल किया। 1973 में डेनमार्क, आयरलैंड और यूनाइटेड किंगडम इसमें शामिल हुए, जबकि 1981 में ग्रीस और 1986 में स्पेन व पुर्तगाल सदस्य बने। इसी वर्ष Single European Act (1986) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका लक्ष्य 1992 तक एक पूर्ण सिंगल मार्केट स्थापित करना और सदस्य देशों के बीच राजनीतिक एकीकरण को और मजबूत करना था।

मास्ट्रिच ट्रीटी और ईयू का जन्म

साल 1992 में साइन हुई मास्ट्रिच ट्रीटी (ट्रीटी ऑन यूरोपीयन यूनियन) ने यूरोप की दिशा ही बदल दी। यह सिर्फ एक आर्थिक समझौता नहीं था, बल्कि इसने यूरोप को एक पॉलिटिकल यूनियन में बदलने की नींव रखी। इस संधि के बाद यूरोपीयन कम्युनिटी  का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से यूरोपीयन यूनियन (ईयू) कर दिया गया। मास्ट्रिच ट्रीटी के तहत एक सिंगल करेंसी – यूरो की नींव रखी गई। 1999 में इसे इलेक्ट्रॉनिक फर्म में लॉन्च किया गया। 2002 में यह कैश के रूप में लागू हुआ। इससे यूरोप की इकोनॉमी को एक यूनिफाइड डायरेक्शन मिली। इस संधि की एक और बड़ी उपलब्धि ईयू सीटिजनशिप थी।

लिस्बन की संधि

2000 के दशक में यूरोपीय संघ (ईयू) ने तेज़ी से विस्तार किया और 2004 में मुख्यतः सेंट्रल और ईस्टर्न यूरोप  के 10 नए देशों को शामिल किया, जो सोवियत यूनियन के पतन के बाद संभव हुआ। इस बड़े विस्तार के साथ EU की संस्थाओं और नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत महसूस हुई। इसी दिशा में 2007 में Treaty of Lisbon पर हस्ताक्षर किए गए, जो 2009 में लागू हुआ। इस संधि का उद्देश्य ईयू को अधिक efficient, democratic और वैश्विक स्तर पर एक मजबूत collective voice के रूप में स्थापित करना था। इसके तहत European Council के President का स्थायी पद बनाया गया और European Parliament की शक्तियों को बढ़ाया गया। वर्तमान में, 2020 में United Kingdom के अलग होने के बाद, EU में कुल 27 सदस्य देश हैं और यह एक unique economic और political partnership के रूप में यूरोप के बड़े हिस्से के governance को प्रभावित करता है।

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