US vs India Tariff War| सरल भाषा में टैरिफ का पूरा गणित समझें |Teh Tak Chapter 1

By अभिनय आकाश | Jan 24, 2026

दुनिया में इन दिनों हथियारों वाले युद्ध से इतर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा टैरिफ वॉर छेड़ा गया है। दुनियाभर के देशों को अपने टैरिफ वॉर का डर दिखा डील साइन करवाते ट्रंप ने माई फ्रेंड मोदी कह कह कर भी भारत के साथ वही हथकंडा अपनाया। दुनिया में एक वॉर चल रही है जिसमें ना तो हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं और ना ही बड़ी-बड़ी मशीनें। लेकिन इसके बावजूद लाखों लोगों की जिंदगी दांव पर है।  जिस तरह से ट्रंप कदम उठा रहे हैं भारत और अमेरिका के बीच 87 अरब डॉलर का निर्यात व्यापार दांव पर है। जहां अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यह टैरिफ उन कई प्रमुख उद्योगों की कंपटीशन को चुनौती देता है जो पहले से ही वैश्विक मंदी का सामना कर रहे हैं। ट्रंप ने इस टैरिफ को ग्लोबल सप्लाई चेन में अमेरिका की ताकत के रूप में पेश किया। 

ट्रेड वॉर क्या होता है

 ट्रेड वॉर एक ऐसी सिचुएशन है जहां दो देश एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिए व्यापार का यानी कि ट्रेड का इस्तेमाल करते हैं। ट्रेड वॉर को आप एक रस्सी की गेम की तरह भी इमेजिन कर सकते हैं। जहां पर दो देश एक दूसरे को हराने के लिए या एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिए अपनी पूरी ताकत लगाते हैं।

फायदा हमेशा ताकतवर का ही रहता

सबसे पहले इस बात को समझ लें जिसे शायद डोनाल्ड ट्रंप भूल गए हैं कि अमेरिका की ही पहल थी कि दुनियाभर के देशों को अपने हितों की हिफाजत करने की छूट मिली। कोई भी देश किसी भी देश के साथ व्यापार कर सकता था। जहां से सस्ता मिले वहां से खरीदों ऐसे बाजार खुला हुआ था। फ्री मार्केट का कंसेप्ट कहा गया और पिछले सात दशकों में अमेरिका इसका झंडाबदार रहा है। लेकिन ट्रंप अचानक इसे पलटना चाहते हैं। पहली सदी से ही दुनिया के अलग अलग हिस्सों के बीच व्यापार शुरू हो चुका था। सिल्क रूट के जरिए चीन का रेशन रोम पहुंचने लगा था। लेकिन इसमें एक समस्या ये थी कि व्यापार तभी फलता फूलता जब कोई ताकत उसकी हिफाजत करती। मंगोल, इस्लामिक सौदागरों से लेकर औपनिवेशिक काल तक चला। रास्ते बदले, सामान भी बदले लेकिन फायदा हमेशा ताककवर का ही रहता था। वही तय करता था कि कौन किससे व्यापार करेगा। किस कीमत पर करेगा। ब्रिटेन की औद्योगिक क्रांति के बाद 20वीं सदी में युद्ध छिड़ा और फिर अमेरिका में एक बिल पास हुआ। जिससे अमेरिका ने ट्रेड पर भारी टैक्स लगाए। फिर जो हुआ उसे हम द ग्रेट डिप्रेशन के नाम से जानते हैं।

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