राजस्थान भाजपा में खींचतान! पोस्टर विवाद पर बोलीं वसुंधरा राजे- मैं लोगों के दिलों में रहना चाहती हूं

By अंकित सिंह | Aug 13, 2021

राजस्थान में जहां एक ओर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच टकराव की स्थिति हैं तो वहीं भाजपा के लिए भी मुश्किलें लगातार जारी है। भले ही भाजपा सचिन पायलट और अशोक गहलोत के विवाद पर खूब तंज कसती हो लेकिन उसके घर की भी स्थिति अच्छी नहीं है। पिछले कुछ समय से वसुंधरा समर्थकों और राजस्थान पार्टी नेतृत्व के बीच टकराव की स्थिति देखने को मिली है। वसुंधरा समर्थक रोहिताश शर्मा ने बयान दिया था कि राजस्थान में वसुंधरा राजे के कद का कोई नेता नहीं है। उसके बाद उन्हें पार्टी से सस्पेंड कर दिया गया है और अब बीजेपी दफ्तर के सामने से उनका पोस्टर भी हटा दिया गया है। 

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पोस्टर विवाद को लेकर वसुंधरा राजे ने साफ तौर पर कहा कि वह पोस्टर कि राजनीति में विश्वास नहीं करती हैं। अपने 30 साल के राजनीतिक जीवन में मैंने हमेशा लोगों के दिलों में जगह बनाने की कोशिश की है। मेरी मां राजमाता सिंधिया ने भी मुझे यही सिखाया है कि लोगों का दुख दर्द बांटों और उन्हें अपने गले से लगाओ तथा उनके दिलों में अपने लिए जगह बनाओ। जब लोगों के दिलों में जगह बन जाती हैं तब राजनीतिक शुरू होती है। वसुंधरा राजे ने बार-बार कहा कि पॉलिटिक्स में सब कुछ नहीं होता है। जब आप लोगों को गले लगाते हैं तब राजनीतिक सफर की शुरुआत होती है। वसुंधरा से सवाल किया गया था कि प्रदेश कार्यालय के बाहर पहले आपका पोस्टर था और बाद में उसे हटा लिया गया। 

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राजे ने बारां-झालावाड़ सहित पूरे हाड़ौती संभाग में बाढ़ से बिगड़ी स्थितियों पर गहरी चिंता जाहिर करते हुए राज्य सरकार की संवेदनहीनता पर दुख व्यक्त किया है। राजे ने एक बयान में कहा,‘‘ बाढ़ और अतिवृष्टि की मार से परेशान हाड़ौती की जनता खून के आंसू रो रहीं हैं जबकि राज्य सरकार जयपुर के सिविल लाइन्स में चैन की नींद सो रही है।’’ उन्होंने कहा,‘‘चक्रवात ताऊते के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दौरा किया मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी बाढ़ग्रस्त इलाक़े का दौरा कर लोगों राहत पहुँचाई। (अब) मुख्यमंत्री (अशोक गहलोत) जी भी बाहर निकलें और जनता की सुध लें।’’ उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिन की अतिवृष्टि से उपजे बाढ़ के हालात में राज्य सरकार ने जनता को अपने हाल पर छोड़ दिया है तथा संकट की इस घड़ी में जनता के दुख-दर्द जानने की जगह मुख्यमंत्री और मंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए समीक्षा कर खानापूर्ति में लगे रहे। उन्होंने कहा कि दर्जनों लोगों की मौत हो गई, सैकड़ों मकान ढह गए, हज़ारों पशु मर गये,लापता हो गए, लेकिन राज्य सरकार और प्रशासन पंगु बना बैठा है।

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