लंदन में मारा गया आतंकवादी PoK में दफन, पाकिस्तान सरकार बेखबर

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Dec 08, 2019

लाहौर/ इस्लामाबाद। ब्रिटेन में दोषी करार दिए गए आतंकवादी और लंदन ब्रिज पर हमला कर दो लोगों की हत्या करने पर स्कॉटलैंड यार्ड द्वारा मार गिराए गए उस्मान खान को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) स्थित उसके पैतृक गांव में दफनाया गया है। हालांकि, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इस बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। लंदन ब्रिज पर हमला करने वाला 28 वर्षीय उस्मान ब्रिटिश नागरिक था और विमान के जरिये उसका शव लंदन से इस्लामाबाद लाया गया और शुक्रवार को परिवार को सौंप दिया गया। 

उस्मान के रिश्तेदार ने कहा कि परिवार उसे ब्रिटेन में दफन नहीं करना चाहता था।’’ उन्होंने बताया कि शव को पाकिस्तान लाने से पहले बर्मिंघम शहर की मस्जिद में नमाज पढ़ी गई। डॉन अखबार के मुताबिक परिवार उस्मान का शव इस्लामाबाद हवाई अड्डे से पीओके के कोटली जिले स्थित किजलानी गांव ले गया और शुक्रवार दोपहर स्थानीय कब्रिस्तान में दफना दिया। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) के महाप्रबंधक (जनसंपर्क) अब्दुल हफीज ने बताया कि उस्मान का शव पीएआई की उड़ान संख्या पीके-792 के जरिये लाया गया। 

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इस बीच, पाकिस्तान विदेश विभाग ने कहा कि उसे इस बात की जानकारी नहीं है कि खान का शव यहां लाया गया है। डॉन अखबार ने विदेश विभाग के प्रवक्ता को उद्धृत किया कि क्या उसका शव पाकिस्तान में है? मेरे पास इसकी कोई जानकारी नहीं है। इससे पहले दो बार (सोमवार और शुक्रवार) भीड़ ने डॉन अखबार के इस्लामाबाद स्थित कार्यालय पर हमला किया और अखबार की प्रतियां जलाई। लोग लंदन ब्रिज हमले में शामिल आतंकवादी के पाकिस्तानी मूल के होने की खबर प्रकाशित करने से नाराज थे। 

उल्लेखनीय है कि 29 नवंबर को पुलिस द्वारा गोली मारे जाने से पहले उस्मान ने लंदन ब्रिज पर आतंकी हमला कर दो लोगों की चाकू से गोदकर हत्या कर दी थी और अन्य तीन को घायल कर दिया था।

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बाद में उसकी पहचान लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर बम धमाके की साजिश रचने और पीओके स्थित अपनी जमीन पर आतंकवादी प्रशिक्षण शिख्स चलाने के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति के रूप में की गई जिसे सात साल पहले कैद की सजा हुई थी। खान ने ब्रिटिश संसद पर मुंबई जैसा हमला करने पर चर्चा की थी। ब्रिटिश न्यायाधीश ने 2012 में आतंकवाद के मामले में उसे सजा सुनाई थी और पिछले साल दिसंबर में उसे पैरोल पर रिहा किया था एवं इलेक्ट्रॉनिक टैग के जरिये उसकी निगरानी की जा रही थी। 

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