By अजय कुमार | Sep 09, 2021
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव किसी भी स्तर का हो, उसका सीधा प्रभाव केन्द्र की राजनीति पर पड़ता है। यूपी से निकला कोई भी सियासी ‘मैसेज’ दूर तक जाता है। इसी लिए भारतीय जनता पार्टी आलाकमान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव की तैयारी ‘युद्धस्तर’ पर शुरू कर दी है। बीजेपी प्रदेश में चुनाव प्रचार के लिए अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट तैयार करने में लगी है तो नेताओं का कार्यक्रम भी तय किया जा रहा है। किस नेता की कहां सभा रखी जाएगी,इसके लिए क्षेत्रीय और जातीय गणित का भी ख्याल रखा जा रहा है। चुनाव जीतने के लिए बीजेपी आलाकमान द्वारा कई स्तर पर रणनीति बनाई जा रही हैं। जरूरत के हिसाब से पार्टी अपना प्लान ए0बी0सी बदलती रहेगी। पार्टी आलाकमान ने यूपी में चुनाव प्रभारियों की जो बड़ी फौज तैयार की है। उसमें कई दिग्गज नेताओं के नाम कई राज्यों में बीजेपी की सरकार बनवाने का रिकार्ड दर्ज है। इतना ही बीजेपी के नवनियुक्त प्रभारियों की जो लिस्ट सामने आई है,उसमें क सभी नेता मोदी की गुड लिस्ट में भी शामिल हैं। बीजेपी की शीर्ष इकाई ने चुनाव प्रभारी और सह-प्रभारी बनाते समय जातीय समीकरण का भी पूरा ख्याल रखा है।
बात इन प्रभारियों और सह-प्रभारियों के सहारे उत्तर प्रदेश में सामाजिक समीकरण साधने की बीजेपी आलाकमान कोशिशोे की कि जाए तो भाजपा ने 2022 के लिए यूपी में जो नए चुनावी रणनीतिकार उतारे हैं। उनके सहारे बीजेपी जातीय गणित तो बैठाना चाह ही रही है इसके साथ ही, धमेंद्र प्रधान से लेकर अनुराग ठाकुर जैसे युवा चेहरों को यूपी की सियासी प्रयोगशाला में अजमाकर भाजपा नेताओं की नई पीढ़ी तैयार करने की कवायद भी आगे बढ़ा रही है। क्.ोंकि, यूपी की सियासी प्रयोगशाला में खरे उतरने वाले चेहरे केंद्रीय राजनीति में भी चमकते रहे हैं।प्रभारी और सह-प्रभारियों के सहारे यूपी में सामाजिक समीकरण साधने की बीजेपी आलाकमान की कोशिशों पर नजर दौड़ाई जाए तो पेट्रोलियम मंत्री से शिक्षा मंत्री की अहम जिम्मेदारी पाने वाले धमेंद्र प्रधान को भाजपा ने यूपी की चुनावी रणनीति बनाने की जिम्मेदारी दी है। कुर्मी बिरादरी से आने वाले प्रधान यूपी में भाजपा के लिए पिछड़ों वर्ग के वोटरों में घुसपैठ बनाने के भी काम आएंगे। संसद के मानसून सत्र में 127 वे संविधान संशोधन विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान प्रधान ने खुद ही इसका भूमिका लिख दी थी। सपा के महासचिव रामगोपाल यादव ने सदन में आरोप लगाया कि भाजपा यादव, कुर्मी, गुर्जरों को आरक्षण से बाहर करने की साजिश रच रही है। तब जवाब में धमेंद्र प्रधान ने कहा था, ‘ सपा यूपी के आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर विभिन्न जातियों के बीच डर पैदा करने की राजनीति कर रही है। चाहे यादव हो गुर्जर हमने किस जाति का आरक्षण खत्म किया? मैं खुद कुर्मी हूं। आप लोगों ने जो गलती की, उसे सुधारने का काम किया है। यूपी के चुनावी मंचों पर आगे भी प्रधान विपक्ष के आरोपों का जवाब देने के काम आएंगे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन के कारण बीजेपी के संभावित नुकसान से लेकर दलितों तक सब पर बीजेपी ने नजरें जमा रखी हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने यूपी में किसान आंदोलन व जाटों की भाजपा से नाराजगी की चर्चा के बीच हरियाणा के कुमार अभिमन्यु को आगे किया हैं। अभिमन्यु की वेस्ट यूपी से नजदीकियां भाजपा के जिए जमीन बेहतर बनाने के काम आएंगी। राजस्थान के अर्जुनराम मेघवाल भी दलित समुदाय से है, वेस्ट यूपी के दलित बहुल जिलों की सीमा राजस्थान से जुड़ी है। बिहार के बड़े भूमिहार नेता सीपी ठाकुर के बेटे विवेक ठाकुर भी यूपी में लगाए गए हैं जो झारखंड की अन्नपूर्णा देवी यूपी में भाजपा के ‘मिशन यादव‘ को साधने के काम आएंगी। अनुराग ठाकुर राजपूत बिरादरी से आने के साथ ही युवा चेहरे भी है।