By संतोष कुमार पाठक | Apr 30, 2026
देश के चार राज्यों- असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल एवं एक केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में हुए विधानसभा चुनाव को लेकर तमाम एग्जिट पोल भी सामने आ चुके है। इस बार का विधानसभा चुनाव , इस मायने में बहुत खास है कि इसमें देश के दो प्रमुख राष्ट्रीय राजनीतिक दलों-कांग्रेस और बीजेपी के साथ ही तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और एआईएडीएमके जैसे ताकतवर क्षेत्रीय दलों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। सबसे बड़ा सवाल तो लेफ्ट फ्रंट के दलों के सामने खड़ा हो गया है क्योंकि केरल की सत्ता हाथ से जाते ही उनके सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाएगा। त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में तो लेफ्ट पार्टियां पहले ही साफ हो चुकी है।
बीजेपी ने नितिन नवीन को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर कई महीने पहले ही बदलाव की शुरुआत कर दी थी लेकिन वह बदलाव अभी संगठन के ढांचे और सरकार तक नहीं पहुंच पाया है। बताया जा रहा है कि चुनावी नतीजों के बाद नितिन नवीन की नई टीम के गठन के लिए उच्चस्तरीय बैठकों का दौर शुरू होगा। बीजेपी आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस बात की है कि वो बुजुर्ग हो चुके नेताओं को संगठन से बाहर रहने के लिए कैसे मना पाते हैं क्योंकि सबसे युवा अध्यक्ष चुनने के बाद पार्टी उनकी टीम को भी युवा नेताओं से ही भरना चाहती है। पार्टी के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष की अध्यक्षता में बीजेपी को पार्टी का फैसला लेने वाली सर्वोच्च ईकाई संसदीय बोर्ड, उम्मीदवारों का चयन करने वाली केंद्रीय चुनाव समिति के साथ ही राष्ट्रीय पदाधिकारियों और मोर्चों का पुनर्गठन करना है। पार्टी में नए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय महासचिव, राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय प्रवक्ता, मीडिया सहित विभिन्न विभागों की टीम के साथ ही राष्ट्रीय मोर्चों का भी पुनर्गठन करना है। इसके बाद बदलाव की यही प्रक्रिया सरकार और राज्यों में भी की जानी है। नई टीम में एक तरफ जहां युवा और अनुभवी नेताओं का संतुलन बनाना होगा वहीं महिलाओं को भी ज्यादा से ज्यादा जगह देनी होगी। बताया जा रहा है कि 4 मई को चुनावी नतीजे आने के 10-15 दिनों के अंदर नितिन नवीन की नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान हो सकता है और इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय का पूरा स्वरूप ही बदला-बदला नजर आएगा।
कांग्रेस में भी बड़े पैमाने पर बदलाव की शुरुआत आने वाले दिनों में होने जा रही है। मोदी-शाह की जोड़ी ने 46 वर्ष के नितिन नवीन को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर राहुल और सोनिया गांधी के सामने दुविधा की स्थिति पैदा कर दी है। मल्लिकार्जुन खड़गे सुलझे हुए परिपक्व नेता तो हैं लेकिन 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को भी एक युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ युवा नेताओं की टीम तो खड़ी करनी ही पड़ेगी। हालांकि यह भी बताया जा रहा है कि राहुल गांधी अभी भी इस बात पर अड़े हुए हैं कि गांधी परिवार का कोई भी व्यक्ति पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनेगा। ऐसे में जाहिर से बात है कि कांग्रेस को राहुल और प्रियंका गांधी से इतर जाकर अन्य युवा नेताओं की तरफ देखना पड़ेगा। इस रेस में फिलहाल सचिन पायलट सबसे आगे बताए जा रहे हैं। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा, दोनों के चहेते नेता सचिन पायलट को आने वाले दिनों में कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया जा सकता है, अगर अशोक गहलोत ने पार्टी के बुजुर्ग नेताओं के साथ मिलकर कोई और खेला नहीं कर दिया तो। ध्यान दीजिएगा कि, यह अकारण नहीं है कि पिछले कुछ दिनों से गहलोत बार-बार पायलट की बगावत का किस्सा सुनाने में लगे हुए है। लेकिन अगर पायलट का नाम पीछे छूट भी गया तो भी राहुल गांधी को पार्टी के लिए नया और वो भी युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष तो ढूंढना ही पड़ेगा। कांग्रेस के अंदर वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे को लेकर भी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि कर्नाटक में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की गुटबाजी पर लगाम कसने के लिए खड़गे को मुख्यमंत्री बनाकर बेंगलुरू भेजा जा सकता है और उनकी जगह पर दिल्ली में नए राष्ट्रीय अध्यक्ष को बैठाया जा सकता है। जाहिर सी बात है कि अगर खड़गे कर्नाटक जाएंगे तो फिर पार्टी को राज्यसभा में भी अपना नया नेता चुनना पड़ेगा। नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ राष्ट्रीय संगठन महासचिव भी किसी युवा नेता को ही बनाना पड़ेगा और उसके बाद कांग्रेस मुख्यालय में भी नए चेहरों की संख्या बढ़ जाएगी।
यह तय मान कर चलिए कि बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में मई के महीने में ही बदलाव होना तय है। हालांकि कांग्रेस में बदलाव की यह रफ्तार थोड़ी धीमी हो सकती है।
- संतोष कुमार पाठक
लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं