Vijaya Ekadashi 2026: विजया एकादशी व्रत से साधक को होती है पूर्ण फलों की प्राप्ति

By प्रज्ञा पांडेय | Feb 12, 2026

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन विजया एकादशी विजय दिलाने वाली एकादशी मानी जाती है। इस व्रत को करने से साधक को सभी पापों से मुक्ति मिलती है तो आइए हम आपको विजया एकादशी व्रत का महत्व एवं पूजा विधि के बारे में बताते हैं। 


जानें विजया एकादशी के बारे में 

धार्मिक मान्यता के अनुसार, फाल्गुन की विजया एकदाशी करने से भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है और जीवन में सुख-शांति आती है। इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि पर किया जाता है। व्रत का पारण करने से साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए खुद यह व्रत रखा था। 


विजया एकादशी का शुभ मुहूर्त 

वैदिक पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 12 फरवरी को दोपहर 12 बजकर 22 मिनट पर होगी। वहीं, तिथि का समापन 13 फरवरी को दोपहर 02 बजकर 25 मिनट पर होगा।


विजया एकादशी व्रत का पारण 

विजया एकादशी 2026 व्रत के पारण का समय 14 फरवरी 2026 को सुबह 07:00 बजे से सुबह 09 बजकर 14 मिनट तक है। इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है।


विजया एकादशी व्रत के पारण की विधि 

पंडितों के अनुसार द्वादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर साफ कपड़े धारण करें। सूर्य देव को अर्घ्य दें और व्रत का संकल्प लें। मंदिर की सफाई करें। चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा को विराजमान करें। फल, फूल और तुलसी के पत्ते अर्पित करें। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। मंत्रों का जप करें। सात्विक भोजन का भोग लगाएं। चरणामृत और तुलसी के पत्ते से व्रत का पारण करें।

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विजया एकादशी पर करें इन चीजों का दान, मिलेगा लाभ 

शास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि पर दान करने का विशेष महत्व है। इस दिन पूजा के बाद अन्न-धन के साथ और चीजों का भी दान करें। पंडितों के अनुसार इस उपाय को करने से धन लाभ के योग बनते हैं और साधक को जीवन में किसी भी चीज की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है।


विजया एकादशी का है खास महत्व

विजया एकादशी का वर्णन पद्म पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। कथा के अनुसार, भगवान श्रीराम ने लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व विजया एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से ही उन्हें रावण पर विजय प्राप्त हुई। इस व्रत से स्वर्णदान, भूमिदान, अन्नदान और गौदान के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। साथ ही, यह व्रत ‘वाजपेय यज्ञ’ के समान पुण्य प्रदान करता है।


विजया एकादशी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी है खास  

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में जब भगवान श्रीराम माता सीता की मुक्ति के लिए लंका पर विजय प्राप्त करने हेतु समुद्र तट पर पहुँचे, तब उनके समक्ष अथाह सागर एक बड़ी बाधा बनकर खड़ा था। वानर सेना सहित समुद्र पार करना असंभव प्रतीत हो रहा था। तब श्रीराम ने समाधान हेतु महर्षि बकदाल्भ्य से मार्गदर्शन प्राप्त किया। महर्षि ने बताया कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की ‘विजया एकादशी’ अत्यंत फलदायी है। यदि श्रद्धा और विधिपूर्वक इस व्रत का पालन किया जाए, तो सभी बाधाएँ दूर होकर विजय का मार्ग प्रशस्त होता है। ऋषि के वचनों को स्वीकार कर भगवान श्रीराम ने एकादशी का उपवास रखा, भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की और पूर्ण श्रद्धा से व्रत संपन्न किया। व्रत के प्रभाव से लंका जाने का मार्ग सुलभ हुआ। नल-नील द्वारा सेतु निर्माण संभव हुआ और अंततः धर्म की अधर्म पर विजय हुई। इसी पुण्य प्रभाव से श्रीराम ने रावण का वध कर सत्य और धर्म की स्थापना की।

 

विजया एकादशी व्रत के नियम भी है विशेष

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन परनिंदा, छल-कपट, क्रोध और द्वेष से दूर रहें। चावल और भारी भोजन का सेवन न करें। काले रंग के वस्त्र पहनने से बचें। रात्रि में भगवान विष्णु के भजन, कीर्तन और नाम-स्मरण करें। विजया एकादशी पर दान का विशेष महत्व

 

विजया एकादशी पर दान का खास महत्व 

सनातन धर्म में दान को कलियुग का सबसे बड़ा धर्म बताया गया है। विजया एकादशी जैसे पावन दिन पर किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है। अन्न, वस्त्र, धन और गौदान इस दिन विशेष रूप से पुण्यदायी माने गए हैं।

विजया एकादशी पर ये चीजें करें दान, मिलेगी सफलता

पंडितों के अनुसार विजया एकादशी के दिन अन्न और भोजन का दान विशेष रूप से लाभदायी होता है। इस दिन निर्धन, असहाय और जरूरतमंद बच्चों को भोजन कराना सर्वोत्तम दान माना गया है। 


विजया एकादशी के दिन घर में ऐसे करें पूजा, होगा लाभ

शास्त्रों के अनुसार सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें। मंदिर के सामने बैठकर हाथ में जल लेकर विजया एकादशी व्रत का संकल्प लें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। भगवान को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। भगवान विष्णु को पीले फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। याद रखें, तुलसी दल के बिना विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। विजया एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में घी के दीपक से आरती करें।


 विजया एकादशी व्रत का धार्मिक महत्व भी है खास

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार विजया एकादशी का व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला माना गया है। यह व्रत न केवल वर्तमान जन्म, बल्कि पूर्व जन्मों के पापों से भी मुक्ति दिलाने वाला है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस एकादशी के प्रभाव से साधक को धर्म, अर्थ, काम और अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है। जीवन में बार-बार आने वाली असफलता, शत्रु बाधा, मानसिक कष्ट और भय से मुक्ति पाने के लिए विजया एकादशी का व्रत अत्यंत प्रभावशाली होता है।

 

विजया एकादशी के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां!

पंडितों के अनुसार एकादशी के दिन कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए, वरना व्रत का फल नहीं मिलता। एकादशी के दिन घर में चावल बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन चावल खाना ‘कीड़े’ खाने के समान माना गया है। एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए।  पूजा के लिए एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लें। इस दिन मन को शांत रखें। किसी की बुराई न करें और न ही झूठ बोलें। मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहें।


विजया एकादशी व्रत से मिलते हैं ये लाभ

धार्मिक मान्यता है कि विजया एकादशी का व्रत पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ रखने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसलिए इस पावन दिन व्रत और पूजा पूरे विधि-विधान से करना चाहिए।


- प्रज्ञा पाण्डेय

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