वैश्विक संकट के दौर में वैश्विक पर्यटन उद्योग

By डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा | Mar 30, 2026

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध के साइड इफेक्ट के रुप में दुनिया का पर्यटन उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। एक मोटे अनुमान के अनुसार 152 करोड़ पर्यटकों से गुलजार रहने वाला वैश्विक पर्यटन उद्योग के वैश्विक हालातों के चलते वर्तमान हालातों में मंदी से भी अतिमंदी के दौर से गुजरने की संभावना से नहीं नकारा जा सकता। वैसे तो सभी देशों में पर्यटन उद्योग पर विपरीत असर पड़ने जा रहा है पर सबसे अधिक असर मध्यपूर्व के देशों में देखा जा सकता है। जानकारों के अनुसार अकेले मध्यपूर्व को ही 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान भुगतना पड़ सकता है। दुनिया में सबसे अधिक पर्यटक फ्रांस की धरती पर जाते है और माना जाता है कि 9 से 10 करोड़ पर्यटक तो फ्रांस का रुख करते हैं। जहां तक भारत का प्रश्न है हमारे यहां भी लगभग 2 करोड़ विदेशी पर्यटक देश के विभिन्न पर्यटन स्थलों का रुख करते हैं। पर युद्ध के वैश्विक हालातों के चलते विश्व के अन्य देशों की तरह से भारत के भी विदेशी पर्यटकों की आवाही पर विपरीत प्रभाव पड़ना ही है। एक सकारात्मक पक्ष यह देखा जा सकता है कि भारत और दुनिया के देशों में देशी पर्यटकों की संख्या में उछाल के चलते इस उद्योग को संजीवनी अवश्य मिलती लगती है। 

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दरअसल वैश्विक हालातों के चलते एक और उड़ाने रद्द होती जा रही है तो युद्ध के चलते लोगों में असुरक्षा की भावना होती जा रही है। पता नहीं कब कहां क्या हो जाए और कहीं जाएं वहीं पर बंद होकर के रह जाएं। इस तरह की आशंकाओं से भी दो चार हो रहे हैं। मध्यपूर्व के देशों में तो लगभग यही हालात है। कब किस देश और किस स्थान पर मिसाइल अटैक हो जाएं कहा नहीं जा सकता। क्योंकि अमेरिका-इजरायल व ईरान युद्ध की खास नकारात्मक बात यह है कि इन दो देशों पर मिसाइल अटैक नहीं हो रहे बल्कि इनसे थोड़ी सी भी सहानुभूति रखने वाले देष कब निशाने पर आ जाएं कहा नहीं जा सकता। मध्यपूर्व में मिसाइल अटैक और हार्मुज जलडमरुमध्य के हालात इसके उदाहरण है। हालात तो यहां तक खराब होने की संभावना से इंकार नहीं करते कि मध्यपूर्व के देषों में तो पानी का गंभीर संकट तो हो सकता है। आज कच्चा तेल, एलपीजी की ही समस्या नहीं अपितु दुनिया को जोड़ने वाले इंटरनेट के बाधित होने की संभावनाओं से नकारा नहीं जा सकता। लगता है एक दूसरे के अहम् के चलते आमआदमी कहीं हाशिये में चला गया है। युद्ध के सामान्य नियम भी ताक में रख दिए गए हैं और आमनागरिकों, बच्चों, अस्पतालों, घनी आबादी इलाकों में भी मिसाइल दागने से कोई परहेज नहीं रह गया है। 

कोरोना के दौरान जिस तरह से पर्यटन उद्योग प्रभावित हुआ था आज उसी तरह के हालात बनते दिख रहे हैं। कोरोना के बाद पिछले सालों में पर्यटन उद्योग ने तेजी पकड़ी थी और लगने लगा था कि 2030 तक पर्यटन उद्योग को जबरदस्त बूस्ट मिलेगा पर अब हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और लगता नहीं है कि आने वाले दिनों में कोई सुधार दिखाई देगा। हांलाकि एक सकारात्मक पक्ष यह देखा जा सकता है कि भारत सहित विश्व के देशों में देशी पर्यटन को अवष्य बढावा मिलने लगा है। लोग अपने ही देश में आसपास के स्थानों को एक्सप्लोर करने लगे हैं। खैर वर्तमान हालात पर्यटन उद्योग के लिए बेहद चुनौती भरे हो गए हैं और सामान्य हालात होने के अभी तो दूर दूर तक आसार ही नहीं दिख रहे हैं।

- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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