Iran-America-Israel युद्ध देखते देखते भारत के दरवाजे तक पहुँच गया, दक्षिण एशियाई देशों की चिंता बढ़ी

By नीरज कुमार दुबे | Mar 05, 2026

हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंता उभर कर सामने आई है क्योंकि अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के निकट अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को डुबो दिया। इस घटना ने न केवल श्रीलंका बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और विशेष रूप से भारत की सामरिक स्थिति पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इस बात का संकेत है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब फारस की खाड़ी से निकल कर हिंद महासागर तक पहुंच गया है, जिसके दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। इस मुद्दे को लेकर राजनीति भी शुरू हो गयी है जहां श्रीलंका के सांसद इस मुद्दे पर अपनी सरकार से सवाल पूछ रहे हैं वहीं भारत में लोकसभा के विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल पूछा है।


हम आपको बता दें कि ईरान का युद्धपोत डेना बुधवार को उस समय डूब गया जब अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागा गया जल गोला उससे टकरा गया। यह घटना श्रीलंका के खोज और बचाव क्षेत्र के भीतर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई। श्रीलंका की नौसेना को युद्धपोत से संकट संदेश प्राप्त हुआ जिसके बाद बचाव अभियान चलाया गया। श्रीलंकाई नौसेना ने अब तक 87 शव बरामद किए हैं और 32 नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है। कई अन्य नाविक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं और उनकी खोज के लिए अभियान जारी है।

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हम आपको बता दें कि यह घटना श्रीलंका के प्रमुख बंदरगाह नगर गाले से लगभग चालीस किलोमीटर दक्षिण में हुई। यह स्थान फारस की खाड़ी से काफी दूर है, जहां ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष चल रहा है। इसलिए इस घटना ने यह संकेत दिया है कि समुद्री संघर्ष का दायरा तेजी से फैल रहा है।


वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश के माध्यम से कहा है कि दुनिया इस समय अत्यंत अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुकी है और आने वाले समय में हालात और कठिन हो सकते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि ईरान का युद्धपोत हिंद महासागर में डूबने की घटना यह दर्शाती है कि यह संघर्ष अब भारत के आसपास के समुद्री क्षेत्र तक पहुंच गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे कठिन समय में देश को मजबूत और संतुलित नेतृत्व की आवश्यकता होती है, लेकिन सरकार की ओर से स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि भारत की सामरिक स्वायत्तता को बनाए रखना इस समय अत्यंत आवश्यक है।


दूसरी ओर, श्रीलंका के सांसद नामल राजपक्षे ने इस घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा है कि यह केवल श्रीलंका की ही नहीं बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। उनका कहना है कि युद्ध भले ही हजारों किलोमीटर दूर चल रहा हो, लेकिन उसके प्रभाव अब हिंद महासागर में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। उन्होंने कहा कि श्रीलंका के तट से लगभग चालीस किलोमीटर दूर इस प्रकार की सैन्य गतिविधि यह दर्शाती है कि वैश्विक शक्तियों का संघर्ष अब इस समुद्री क्षेत्र तक फैल रहा है।


श्रीलंकाई सांसद नामल राजपक्षे ने श्रीलंका की सरकार से यह भी सवाल किया है कि क्या उसे इस सैन्य कार्रवाई की पहले से जानकारी थी? उनका कहना है कि सरकार को देश की जनता और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह इस हमले से पहले अवगत थी या नहीं? उन्होंने कहा कि यदि सरकार को पहले से जानकारी थी तो उसे यह बताना चाहिए कि ऐसी गतिविधि को लेकर कौन से कदम उठाए गए?


उन्होंने यह भी कहा कि यदि श्रीलंका को इस प्रकार की सैन्य गतिविधि की सूचना नहीं दी गई थी तो यह और भी गंभीर विषय है, क्योंकि इससे छोटे देशों की समुद्री संप्रभुता और सुरक्षा पर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी बड़े देश की सैन्य कार्रवाई श्रीलंका के आसपास के जल क्षेत्र में होती है तो इस पर खुली चर्चा और पारदर्शिता आवश्यक है। राजपक्षे ने दक्षिण एशियाई देशों के बीच व्यापक संवाद की भी आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों को मिलकर हिंद महासागर की सुरक्षा पर गंभीर चर्चा करनी चाहिए। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और प्रत्येक देश की संप्रभुता का सम्मान किया जाना चाहिए। यदि बड़े देशों के बीच संघर्ष छोटे देशों के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में फैलता है तो इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।


दूसरी ओर अमरीकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा है कि अमेरिकी पनडुब्बी ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में मौजूद एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के व्यापक अभियान का हिस्सा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि ईरान की नौसैनिक शक्ति को सीमित करना उसकी रणनीति का महत्वपूर्ण भाग है।


देखा जाये तो हिंद महासागर में इस प्रकार की सैन्य कार्रवाई के कई महत्वपूर्ण सामरिक निहितार्थ हैं क्योंकि यह क्षेत्र विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के बीच होने वाला विशाल व्यापार इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। यदि यहां सैन्य तनाव बढ़ता है तो वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही भारत के लिए यह स्थिति अत्यंत संवेदनशील है। हिंद महासागर भारत की समुद्री सुरक्षा और आर्थिक हितों का मुख्य क्षेत्र है। यदि बाहरी शक्तियों का संघर्ष इस क्षेत्र में बढ़ता है तो भारत को अपनी नौसैनिक उपस्थिति और सामरिक सतर्कता बढ़ानी पड़ सकती है।


इसके अलावा, छोटे तटीय देशों जैसे श्रीलंका, मालदीव और बांग्लादेश के लिए यह चुनौतीपूर्ण स्थिति है। ये देश बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन यदि सैन्य टकराव उनके आसपास होने लगे तो उनकी सुरक्षा और कूटनीतिक स्थिति कठिन हो सकती है। साथ ही इस घटना से यह भी संकेत मिलता है कि भविष्य के युद्ध केवल सीमित क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि समुद्र के विशाल क्षेत्रों में फैल सकते हैं। इससे हिंद महासागर आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।


बहरहाल, श्रीलंका के निकट हुई यह घटना इस बात का संकेत है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अब व्यापक समुद्री क्षेत्र तक फैल सकता है। ऐसे में दक्षिण एशियाई देशों के लिए आवश्यक है कि वह मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करें और संभावित संकटों के लिए तैयार रहें।

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