इतिहास का सबसे लंबा अनुत्तरित प्रश्न नेताजी की मौत

By योगेश कुमार गोयल | Jan 23, 2026

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत का रहस्य आज भी अनसुलझा है। दरअसल उनकी मृत्यु के संबंध में कई दशकों से यही दावा किया जाता रहा है कि 18 अगस्त 1945 को सिंगापुर से टोक्यो (जापान) जाते समय ताइवान के पास फार्मोसा में उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और उस हवाई दुर्घटना में उनका निधन हो गया था। नेताजी ने 16 अगस्त 1945 को टोक्यो से ताइपेई के लिए उड़ान भरी थी और जापानी द्वितीय विश्व युद्ध का उनका विमान 18 अगस्त की सुबह ताइपेई के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। उसके बाद जापान सरकार द्वारा घोषणा की गई थी कि उस दुर्घटना में विमान में सवार सभी 25 लोगों की मौत हो गई, जिनमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस भी शामिल थे। 18 अगस्त 1945 को ताइवान के ताइपेई में विमान दुर्घटना में उनकी मौत की जापान सरकार द्वारा की गई आधिकारिक घोषणा को भारत सरकार ने भी स्वीकार कर लिया था लेकिन आज भी कई लोग इसे मानने को तैयार नहीं हैं। दरअसल उनके जीवित होने और गुमनामी में जीवन जीने के दावे किए जाते रहे हैं और इस विषय पर कई बार जांच भी हुई है। हालांकि नेताजी के जीवित होने का दावा करने वाले लोगों ने कई बार अपने दावों का समर्थन करने के लिए सबूत पेश किए लेकिन उन सबूतों को प्रायः संदिग्ध माना गया है और कहा जाता रहा है कि उनके जीवित होने के दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं हैं।

इसे भी पढ़ें: Subhash Chandra Bose Birth Anniversary: Netaji Bose ने देश के लिए ठुकराई थी ICS की नौकरी, बनाई Azad Hind Fauj

नेताजी के जीवित रहने को लेकर किए गए विभिन्न दावों में कहा गया कि वे विमान दुर्घटना में नहीं मारे गए थे बल्कि जीवित बच गए थे और उन्होंने अपने जीवन का बाकी हिस्सा गुप्त रूप से बिताया। ऐसे ही दावों में से एक दावा यह भी था कि विमान दुर्घटना में नेताजी को गंभीर रूप से चोटें लगी थी लेकिन वे जीवित बच गए थे और उन्हें एक जापानी अस्पताल में ले जाया गया था, जहां उनका इलाज किया गया और बाद में उन्हें सोवियत संघ ले जाया गया, जहां उन्हें एक गुप्त शिविर में रखा गया। एक अन्य दावा यह भी था कि नेताजी ने विमान दुर्घटना में बचने के लिए अपना रूप बदल लिया था। उन्होंने अपना नाम और पहचान बदल ली थी और एक गुप्त जीवन जीने लगे थे। कुछ लोगों ने यह दावा भी किया कि उन्होंने नेताजी को गुप्त रूप से रहने के दौरान देखा है। हालांकि इन तमाम दावों में से किसी का भी कोई पुख्ता सबूत कभी नहीं मिला लेकिन इन दावों को लेकर सच्चाई जानने को लेकर लोगों में सदैव उत्सुकता रही है। उनकी मौत के रहस्य को सुलझाने के लिए कई बार जांच आयोग भी बैठाए गए, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण जांच आयोग न्यायमूर्ति ताराचंद की अध्यक्षता में 1956 में बैठाया गया था। ताराचंद आयोग ने अपने निष्कर्ष में कहा था कि नेताजी की मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई थी। आयोग ने कहा था कि नेताजी के जीवित रहने के दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है लेकिन आयोग के निष्कर्षों को कई लोगों ने चुनौती दी थी, जिनका कहना था कि आयोग ने नेताजी के जीवित रहने के दावों की पर्याप्त जांच नहीं की थी। आज भी दावे के साथ यह कहना मुश्किल है कि नेताजी की मृत्यु कैसे हुई थी। हो सकता है कि वे विमान दुर्घटना में मारे गए हों या यह भी हो सकता है कि वे जीवित बच गए हों और उन्होंने अपना जीवन गुप्त रूप से बिताया हो। कुल मिलाकर, उनकी मौत का रहस्य आज भी अनसुलझा है और इस रहस्य को सुलझाने के लिए और अधिक जांच की आवश्यकता है।

- योगेश कुमार गोयल

(लेखक 36 वर्षों से पत्रकारिता में निरंतर सक्रिय वरिष्ठ पत्रकार हैं)

प्रमुख खबरें

RBI का Rules पर बड़ा प्रहार, 135 Non-Banking कंपनियों का पंजीकरण हुआ रद्द।

Mukesh Ambani का एक फैसला और बाजार में हरियाली, Reliance की तेजी ने निवेशकों को किया खुश।

Gold Price पर दोहरी मार: Profit Booking और US संकेतों से 1.50 लाख के नीचे फिसला सोना

विवादों के बीच बड़ा बदलाव: Ben Stokes बाहर, Jofra Archer की वापसी, Joe Root बने England के नए कप्तान।