By नीरज कुमार दुबे | May 19, 2026
बांग्लादेश से होने वाली अवैध घुसपैठ के रास्ते बंद होने की आशंका ने सीमापार बैठे घुसपैठियों और तस्करी गिरोहों के मन में खौफ पैदा कर दिया है। बताया जा रहा है कि कड़ी निगरानी और तेजी से होने वाली बाड़बंदी की संभावना को देखते हुए कुछ अवैध घुसपैठिये खुद ही वापस लौटने लगे हैं, जबकि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों ने भी भारत में घुसपैठ की अपनी योजना बदल दी है जो अब तक पश्चिम बंगाल की ढीली सीमा व्यवस्था का फायदा उठाने की सोच रहे थे। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य में डबल इंजन सरकार का गठन माना जा रहा है, जिसने सत्ता संभालते ही राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए बड़ा कदम उठाया है। हम आपको बता दें कि मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण चिकन्स नेक गलियारे में सीमा सुरक्षा बल को लगभग एक सौ बीस एकड़ जमीन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि भारत बांग्लादेश सीमा पर बाड़बंदी और सुरक्षा व्यवस्था को अभेद बनाया जा सके। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने की मंजूरी भी दे दी गई है, ताकि सीमा सुरक्षा, सैन्य आवाजाही और संपर्क ढांचे को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
हम आपको बता दें कि भारत बांग्लादेश सीमा पर लंबे समय तक सीमावर्ती जमीन सीमा सुरक्षा बल को नहीं दिये जाने के कारण कई इलाकों में बाड़बंदी अधूरी रही, जिसका फायदा अवैध घुसपैठियों, तस्करों और आपराधिक गिरोहों ने उठाया। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार पश्चिम बंगाल में भारत बांग्लादेश सीमा के सैकड़ों किलोमीटर हिस्से में बाड़ लगाने का काम भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक अड़चनों के कारण वर्षों तक अटका रहा। इसी वजह से सीमा के अनेक हिस्से खुले और संवेदनशील बने रहे, जहां से अवैध रूप से लोगों की आवाजाही लगातार होती रही। सुरक्षा विशेषज्ञों ने बार बार चेतावनी दी कि खुली सीमा का उपयोग केवल अवैध प्रवास के लिए ही नहीं बल्कि पशु तस्करी, नकली मुद्रा, मानव तस्करी और कट्टरपंथी नेटवर्क द्वारा भी किया जा रहा है। कई सीमावर्ती गांवों के लोगों ने भी बिना बाड़ वाले इलाकों में लगातार घुसपैठ और असुरक्षा का भय व्यक्त किया है।
इस बढ़ती घुसपैठ का असर भारत की आंतरिक सुरक्षा, जनसांख्यिक संतुलन और आर्थिक व्यवस्था पर पड़ा। सीमावर्ती राज्यों में अवैध बस्तियों के विस्तार, फर्जी पहचान पत्रों के नेटवर्क और तस्करी से जुड़ी गतिविधियों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई। कई बार सीमा पार से अपराधियों और घुसपैठियों के हमलों में सीमा सुरक्षा बल के जवानों तथा स्थानीय नागरिकों को भी नुकसान उठाना पड़ा। रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि अधूरी बाड़बंदी के कारण सीमा पर तनाव और हिंसक घटनाएं बढ़ीं, जिससे भारत बांग्लादेश संबंधों पर भी असर पड़ा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते पूरी जमीन सीमा सुरक्षा बल को सौंप दी जाती और बाड़बंदी पूरी हो जाती, तो अवैध घुसपैठ और उससे जुड़ी आपराधिक गतिविधियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता था।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल सरकार ने सात महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों को राज्य लोक निर्माण विभाग से हटाकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड को सौंपने का निर्णय लिया है। इन सात में से पांच सड़कें सीधे चिकन्स नेक गलियारे से होकर गुजरती हैं। इनमें सेवोक कालिम्पोंग सिक्किम सीमा मार्ग, सिलीगुड़ी कुर्सियांग दार्जिलिंग मार्ग, हासीमारा जयगांव भूटान सीमा मार्ग तथा चांगराबांधा बांग्लादेश सीमा मार्ग जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण रास्ते शामिल हैं।
इन मार्गों का महत्व केवल सामान्य यातायात तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन, सैन्य रसद और सीमावर्ती राज्यों की आपूर्ति व्यवस्था के लिए भी जीवनरेखा माने जाते हैं। विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्ग 10, जो सिक्किम को जोड़ता है और राष्ट्रीय राजमार्ग 110, जो दार्जिलिंग तक पहुंच प्रदान करता है, लंबे समय से भूस्खलन, भारी वर्षा और सड़क क्षति जैसी समस्याओं से जूझते रहे हैं। कई बार इन मार्गों के बाधित होने से सिक्किम और दार्जिलिंग क्षेत्र का संपर्क टूट जाता था, जिससे आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और लोगों की आवाजाही प्रभावित होती थी।
मुख्य सचिव कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि इन सात सड़क खंडों के विकास से सिक्किम, भूटान और बांग्लादेश तक संपर्क व्यवस्था मजबूत होगी। इसके अलावा दार्जिलिंग की पहाड़ियों, डुआर्स और उत्तर बंगाल को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से बेहतर ढंग से जोड़ा जा सकेगा। इससे मालदा और मुर्शिदाबाद के रास्ते बिहार बंगाल गलियारे को भी मजबूती मिलेगी। साथ ही मुर्शिदाबाद, नदिया और उत्तर 24 परगना से होते हुए भारत बांग्लादेश सीमा स्थित घोजाडांगा तक जाने वाले सड़क मार्ग को भी उन्नत बनाया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार ये भूमि हस्तांतरण और सड़क सौंपने के प्रस्ताव लंबे समय से लंबित थे और पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान इन पर कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया था। अब नई सरकार द्वारा इन प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने के बाद सड़क चौड़ीकरण, मरम्मत और आधुनिकीकरण से जुड़े कार्यों में तेजी आने की संभावना है। इससे रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलने के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियों, पर्यटन और आपातकालीन सैन्य तैनाती में भी बड़ा लाभ होगा।
इसमें कोई दो राय नहीं कि चिकन्स नेक गलियारा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्र है। पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंच बनाए रखने के लिए इस क्षेत्र की सुरक्षा और संपर्क व्यवस्था मजबूत होना बेहद आवश्यक है। ऐसे में सीमा सुरक्षा बल को जमीन हस्तांतरण और राष्ट्रीय राजमार्गों का केंद्रीकृत विकास आने वाले समय में इस पूरे क्षेत्र की सामरिक क्षमता को नई मजबूती प्रदान कर सकता है।
बहरहाल, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने भारत बांग्लादेश सीमा पर बढ़ती घुसपैठ, अधूरी बाड़बंदी और सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था। पार्टी लगातार आरोप लगाती रही कि पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार की उदासीनता के कारण सीमा सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्ताव वर्षों तक लंबित पड़े रहे। अब राज्य में सरकार बनने के बाद कैबिनेट की पहली बैठक में मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी द्वारा सीमा सुरक्षा बल को जमीन सौंपने और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मार्गों के विकास को मंजूरी देने के फैसले को चुनावी वादों को पूरा करने के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्णय के जरिये राज्य सरकार ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमाओं की मजबूती उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।