भारत की भूमि पर भी दिखी अमेरिका और रूस के बीच की जंग! Russia-Ukraine War का असर एस जयशंकर की G20 डिनर डेट पर दिखा

By रेनू तिवारी | Mar 02, 2023

शीत युद्ध के दौरान विश्व दो गुटों में बट गया था। उस दौरान दो महाशक्तियां अमेरिका और सोवियत संघ एक-दूसरे से उपर होने की होड़ में थी। सोवियत संघ के विघटन के साथ ही अमेरिका विश्व की सबसे बड़ी पावर के रुप में उभरा। भले ही सोवियत संघ का विघटन हो गया हो लेकिन रुस और अमेरिका के बीच का तनाव आज तक खत्म नहीं हुआ हैं। 1991 के बाद रुस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद ये तनाव अपने चरम पर दिखा हैं। अब भारत जी20 की अध्यक्षता कर रहा हैं। नयी दिल्ली में सभी विदेशमंत्रियों के साथ मीटिंग चल रही है लेकिन दोनों देशों के बीच की खट्टास यहां पर भी देखने को मिली हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा आयोजित जी20 विदेश मंत्रियों के उद्घाटन रात्रिभोज में शामिल नहीं हुए। रूस-यूक्रेन युद्ध की पृष्ठभूमि में भारत के इन डिनर में भी वाशिंगटन और मास्को के बीच की कड़वाहट देखने को मिली। 

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ब्लिंकन के बुधवार देर रात नई दिल्ली पहुंचने पर अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा अमेरिका वैश्विक चुनौतियों के लिए कार्रवाई-उन्मुख समाधान प्रदान करने के लिए भारत की जी20 प्राथमिकताओं का पुरजोर समर्थन करता है।अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित आदेश के लिए रूस का क्रूर विरोध, बर्दाश्त नहीं कर सकता। बहुपक्षीय संस्थानों और निकायों सहित, यूक्रेन के खिलाफ अपने अकारण और अन्यायपूर्ण युद्ध के लिए अमेरिका रूसी संघ को जिम्मेदार ठहराना जारी रखेगा। यूक्रेन के खिलाफ रूस का युद्ध संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करता है। 

 

अमेरिका ने कहा  रूस के यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण से उपजी अपार मानवीय चुनौतियों का समाधान करने के लिए अमेरिका G20 और अन्य अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ जुड़ना जारी रखेगा, विशेष रूप से क्रेमलिन के आक्रामकता के युद्ध का हानिकारक प्रभाव वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ा है। G20 को अनाज वितरण के लिए समुद्री मार्गों को फिर से खोलने के संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों का जवाब देने में विफल रहने के लिए अब रूस को जवाबदेह ठहराना चाहिए। इन चुनौतियों का सामना करने का उत्तर निकट अंतरराष्ट्रीय सहयोग और स्पष्ट संकल्प है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि इस तरह की बेशर्म आक्रामकता अनियंत्रित न हो। हमें उन लोगों को जवाबदेह ठहराना चाहिए; युद्ध छेड़ने के दौरान क्रेमलिन के साथ हमेशा की तरह व्यापार में कोई वापसी नहीं हो सकती है। 

 

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मॉस्को ने अपने बयान में कहा, "हम एकीकृत एजेंडे को बढ़ावा देने की भारत की जी20 अध्यक्षता की प्रतिबद्धता का समर्थन करते हैं जो बहुपक्षीय कूटनीति में विश्वास बहाल करेगा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के विखंडन को रोकेगा।" 

 

दिल्ली में 2 मार्च को  G20 की बैठक हुई और तमाम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें सबसे प्रमुखता से बात रूस-यूक्रेन विवाद पर हुई। इसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर की कई देशों के समकक्षों के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी होगी। नई दिल्ली ने कहा कि रूस-यूक्रेन विवाद विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने कहा, "रूस-यूक्रेन संघर्ष की प्रकृति और विकासशील स्थिति को देखते हुए, यह स्वाभाविक रूप से जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान चर्चा का एक महत्वपूर्ण बिंदु होगा। क्वात्रा ने कहा कि नेता रूस-यूक्रेन की स्थिति पर चर्चा करेंगे, और नोट किया कि खाद्य, ऊर्जा और उर्वरक सुरक्षा पर संघर्ष का प्रभाव भारतीय राष्ट्रपति पद के लिए प्रमुख फोकस क्षेत्रों में से एक होगा। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि मेरे लिए जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के नतीजों का पूर्व-आंकलन करना सही होगा। हम बहुत स्पष्ट हैं कि विदेश मंत्रियों को उन सभी प्राथमिकताओं पर ध्यान देना चाहिए जो वर्तमान में वैश्विक संदर्भ में प्रासंगिक हैं।

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