योगी सरकार का कैबिनेट विस्तार, भाजपा नेतृत्व की मंशानुरूप करेगा 2027 के विधानसभा चुनावों में भाजपा की नैय्या पार?

By दीपक कुमार त्यागी | May 13, 2026

राजनीतिक गुणा-भाग व विधानसभा चुनावों के चलते उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से लंबित चले आ रहे यूपी कैबिनेट के विस्तार पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की आखिरकार मौहर लग ही गई‌। जिसके बाद से उत्तर प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी बहुत तेज़ हो गयी थी। शनिवार शाम 9 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से मुलाकात के बाद से ही कैबिनेट विस्तार में शामिल होने वाले चहरों के वारे में राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे थे। वहीं लखनऊ स्थित जन भवन में होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह के लिए भी शासन-प्रशासन के द्वारा सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार 10 मई 2026 की दोपहर 3.30 बजे अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए 6 नये चहरों भूपेंद्र चौधरी व मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री, कृष्णा पासवान, कैलाश राजपूत, सुरेन्द्र दिलेर व ⁠हंसराज विश्वकर्मा को राज्य मंत्री बनाया, वहीं अजीत पाल और सोमेंद्र तोमर का कद बढ़ाते हुए उन्हें राज्य मंत्री की जगह राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया।

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इस कैबिनेट विस्तार में शामिल राजनेताओं के प्रोफाइल पर संक्षिप्त नज़र डालें तो कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी वर्ष 2017-2022 वाली योगी सरकार में भी पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं और वह भाजपा के निवर्तमान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। वह राजनीति के एक मंझे हुए खिलाड़ी और बड़े जाट नेता के रूप में स्थापित माने जाते हैं। वहीं तेजतर्रार, व्यवहार कुशल, दबंग विधायक मनोज पांडेय ब्राह्मण समाज से आते हैं, वह रायबरेली के ऊंचाहार से विधायक हैं, वह सपा की अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने राज्यसभा के चुनावों में खुलकर के भाजपा प्रत्याशी का साथ दिया था, जिसके बाद उन्हें सपा से निष्कासित कर दिया गया था, जिसके बाद उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाकर के ईनाम दिया गया है। उनकी ताजपोशी से भाजपा के नेतृत्व स्पष्ट संदेश दे दिया है कि भाजपा सहयोग करने वालों का हमेशा ध्यान रखती है।

मेरठ दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक डॉक्टर सोमेंद्र तोमर गूर्जर समाज से आते हैं, डॉक्टर तोमर सरल स्वभाव के शानदार राजनेता हैं, फिलहाल वह योगी सरकार में राज्य मंत्री ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत का कार्यभार देख रहे हैं, कैबिनेट विस्तार में उन्हें राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के रूप में शपथ दिलाई गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव निरंतर गूर्जर वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए प्रयास कर रहे हैं, डॉक्टर तोमर के प्रमोशन को गूर्जर वोटरों को साधने की भाजपा नेतृत्व की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

वहीं कानपुर देहात के सिकंदरा से भाजपा के विधायक अजीत पाल फिलहाल योगी सरकार में राज्य मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का कार्य देख रहे हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उनका प्रमोशन करते हुए उन्हें राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार के पद की शपथ दिलाई है।

वहीं कैबिनेट विस्तार में शामिल राज्य मंत्रियों की बात करें तो कन्नौज के तिर्वा से विधायक विधायक कैलाश सिंह राजपूत, वाराणसी में भाजपा के जिलाध्यक्ष और विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा, अलीगढ़ के खैर से भाजपा के विधायक सुरेंद्र दिलेर, फतेहपुर के खागा से भाजपा की विधायक कृष्णा पासवान ने पहली बार राज्यमंत्री के रूप में पद व गोपनीयता की शपथ ली है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को योगी सरकार के इस कैबिनेट विस्तार से बहुत उम्मीदें हैं।

हालांकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के कोर वोटर माने जाने वाले त्यागी समाज के हाथ इस बार के कैबिनेट विस्तार में भी खाली ही रहे, जबकि त्यागी समाज के एक मात्र विधायक अजीत पाल त्यागी व विधान परिषद सदस्य अश्विनी त्यागी दोनों में से कम से कम एक का नाम कैबिनेट विस्तार की इस लिस्ट में शामिल होने की उम्मीद की जा रही थी।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो योगी आदित्यनाथ सरकार के कैबिनेट विस्तार का लक्ष्य वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक, सामाजिक, जाति और क्षेत्रीय समीकरण साधते हुए योगी सरकार के पक्ष में जबरदस्त उत्साहपूर्ण माहौल बनाने का है। वहीं भाजपा का शीर्ष नेतृत्व सपा प्रमुख अखिलेश यादव के पीडीए फार्मूला तोड़ करते हुए योगी सरकार के पक्ष में ब्राह्मण, ओबीसी, दलित व अन्य सभी सनातनियों को एकजुट करना है। हालांकि यह तो आने वाला समय ही बताएगा की भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इसमें राजनीतिक गुणा-भाग में कितना सफल होगा, लेकिन जनता की अदालत में बार-बार के चुनाव परिणामों से यह स्पष्ट है कि मोदी, शाह व योगी की लोकप्रियता व चाणक्य नीति की काट का अभी देश में विपक्षी दलों के पास कोई विकल्प नहीं है।

- दीपक कुमार त्यागी

अधिवक्ता, स्वतंत्र पत्रकार, स्तंभकार व राजनीतिक विश्लेषक

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