विकास में भेदभाव का शिकार हो रहे हैं प्रमुख तीर्थस्थल

काशी के अलावा देश के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थल वाले जिलों में विकास चींटी की रफ्तार से रेंग रहा है या फिर उसकी सुध नहीं ली जा रही है। काशाी के अलावा देश के प्रमुख हिन्दू तीर्थ स्थलों में आधारभूत सुविधाओं की बेहद कमी है। वैष्णों देवी के लिए प्रसिद्ध कटरा जिले में मूसलाधार बारिश के दौरान भूस्खलन की गंभीर समस्या है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ससंदीय क्षेत्र होने के कारण काशी में जहां तरक्की और घोषणाओं की बरसात हो रही है, वहीं देश के दूसरे प्रमुख हिन्दू तीर्थ स्थल विकास की बाट जोह रहे रहे हैं। मोदी का निर्वाचन क्षेत्र होने के कारण केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का पूरा जोर काशी तक सीमिट कर रहा गया है। यदि यह मान भी लिया जाए कि काशी हिन्दुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल है, इसलिए इसके विकास की दरकार है, तो ऐसे में देश के प्रमुख राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अन्य तीर्थ स्थल विकास की दौड़ में काशी से काफी पीछे क्यों हैं। कारण साफ नजर आता है कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र होने के कारण काशी में विकास की गंगा बह रही, वहीं अन्य प्रमुख धार्मिक स्थल वाले जिले बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
वर्ष 2014 से मार्च 2025 तक काशी में विकास के तहत कुल 48,459 करोड़ रुपय की लागत से 580 परियोजनाओं पर काम शुरू किया गया है। काशी के विकास की घोषणाओं की शुरुआत मोदी के पहली बार सांसद बनने के साथ ही शुुरु हो गई थी। यह सिलसिला लगातार जारी है। हाल ही में पीएम मोदी ने अपने दो दिवसीय वाराणसी दौरे के दौरान 6332 करोड़ रुपये की कुल 163 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें गंगा पर सिग्नेचर ब्रिज सबसे बड़ी परियोजना है। जिसकी लागत करीब ₹2464.46 करोड़ है। यह ब्रिज काशी की कनेक्टिविटी और ट्रैफिक व्यवस्था को नई दिशा देगा। प्रधानमंत्री के हाथों ₹1054.69 करोड़ की 50 परियोजनाओं का लोकार्पण और ₹5277.39 करोड़ की 113 परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया।
काशी के अलावा देश के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थल वाले जिलों में विकास चींटी की रफ्तार से रेंग रहा है या फिर उसकी सुध नहीं ली जा रही है। काशाी के अलावा देश के प्रमुख हिन्दू तीर्थ स्थलों में आधारभूत सुविधाओं की बेहद कमी है। वैष्णों देवी के लिए प्रसिद्ध कटरा जिले में मूसलाधार बारिश के दौरान भूस्खलन की गंभीर समस्या है। जम्मू और कटरा के बीच सड़क और रेल संपर्क अक्सर टूट जाता है। विशेष रूप से, 2025 की बाढ़ के बाद से ट्रेनों का रद्दीकरण और पुलों (जैसे कठुआ, उधमपुर के पास) को नुकसान ने यात्रा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गंभीर झटका दिया है। कटरा में स्मार्ट सड़कों, सुव्यवस्थित पार्किंग, और आधुनिक बुनियादी ढांचे की कमी है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को संभालने के लिए मौजूदा सुविधाएं नाकाफी हैं। बढ़ती भीड़ के कारण गर्मियों में पेयजल और निरंतर बिजली आपूर्ति की समस्या बनी रहती है। लगातार निर्माण, वनों की कटाई और भीड़भाड़ के कारण पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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राम मंदिर के विख्यात अयोध्या में बाल विकास विभाग की एक रिपोर्ट ने जिले में कुपोषण की चिंताजनक स्थिति को उजागर की है। जिले के 2,381 आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 2,28,018 बच्चों की जांच में 7,520 बच्चे कुपोषित पाए गए हैं। इनमें 1,199 बच्चे अति कुपोषित (सैम) और 6,321 बच्चे मध्यम गंभीर कुपोषित (मैम) श्रेणी में हैं। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 264 और 2024-25 में 286 अति कुपोषित बच्चों को पुनर्वास केंद्र भेजा गया। विकास परियोजनाओं के कारण हजारों लोग, विशेषकर छोटे व्यापारी और गरीब, अपने पुश्तैनी आवासों और व्यवसायों से विस्थापित हो गए हैं। परियोजनाओं के कारण उड़ने वाली धूल और निर्माण सामग्री से स्थानीय लोगों को सांस संबंधी बीमारियां हो रही हैं। जल भराव और सीवर के गंदे पानी के घरों में घुसने की समस्या से लोग लंबे समय से परेशान हैं। पुरानी अयोध्या (फैजाबाद) और अयोध्या धाम के बीच आवागमन में मुश्किल हो रही है।
देश के 12 ज्योतिर्लिंग में शामिल केदारनाथ के रुद्रप्रयाग जिले के कई सुदूरवर्ती गांव अभी भी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव से जूझ रहे हैं, जहाँ आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संपर्क मार्ग बाधित होने और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को स्वास्थ्य उपचार के लिए भटकना पड़ता है। भारी बारिश के कारण संपर्क मार्ग बाधित होना भी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच में एक बड़ी बाधा है। जिले भर में लगभग 25 जल स्रोत सूख चुके हैं, जिससे पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई है। पानी की कमी से नाराज लोग जल संस्थान के खिलाफ प्रदर्शन कर चुके हैं। इसी तरह उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, धार्मिक पर्यटन के दबाव और प्रशासनिक चुनौतियां मौजूद हैं। नालों और सार्वजनिक भूमि पर अवैध निर्माण के कारण जल निकासी बाधित हो रही है। मानसून से पहले नालों पर अतिक्रमण के कारण जलभराव का खतरा बना रहता है। हरकी पैड़ी और आसपास के क्षेत्रों में भिक्षावृत्ति एक बड़ी समस्या है। चारधाम यात्रा के सुचारू न रहने या व्यवस्थाओं के कारण स्थानीय होटलों और पर्यटन व्यवसाय पर भी असर पड़ रहा है।
कृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में ₹30,000 करोड़ से अधिक की ब्रज मास्टर प्लान परियोजनाओं और नई आवासीय योजनाओं के लिए ₹850 करोड़ के बावजूद, कई विकास कार्य फाइलों में अटके हैं। वर्ष 2026-2030 के मास्टर प्लान के अंतर्गत शहर को हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने का विज़न है, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते जमीनी स्तर पर गति धीमी है। मथुरा-वृंदावन में वर्षभर धार्मिक आयोजनों की लंबी श्रृंखला चलती रहती है। प्रमुख आयोजनों में होलिकोत्सव, मुड़िया मेला, जन्माष्टमी, राधाष्टमी, झूलन उत्सव, कार्तिक मास, गोवर्धन पूजा और ब्रज की विभिन्न परिक्रमाएं शामिल हैं। आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या 8 से 10 लाख तक पहुंच जाती है। भीड़ प्रबंधन अब भी मुख्यतः पुलिस के भरोसे ही संचालित हो रहा है। कई बार मास्टर प्लान और विस्तृत प्रस्ताव तैयार किए गए, लेकिन जमीन पर उतरते हुए नजर नहीं आए।
हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थस्थल में शुमार प्रयागराज शहर वर्तमान में कई गंभीर सामाजिक और बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। मुख्य समस्याओं में गंगा-यमुना की बाढ़ से फसल व जनजीवन का नुकसान, बजबजाती नालियां व कूड़े के ढेर के कारण गंदगी, सीवर लाइन का अभाव, यातायात जाम और अवैध अतिक्रमण शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ के बाद बीमारियां और मच्छरों का प्रकोप भी एक बड़ी चुनौती है। गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में विकास और पर्यटन के बावजूद कई प्रमुख सामाजिक और नागरिक समस्याएं मौजूद हैं, जो स्थानीय निवासियों और तीर्थयात्रियों को प्रभावित करती हैं।
गुजरात सोमनाथ मंदिर (प्रथम ज्योतिर्लिंग) जिले में पर्यटन और आस्था के केंद्र होने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सामाजिक और नागरिक समस्याएं भी विद्यमान हैं। इस क्षेत्र में दलित समुदाय के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं (जैसे ऊना की घटना) और हाशिए पर स्थित समुदायों के उत्पीड़न की समस्या रही है। जमीन के अधिकारों को लेकर विवाद और अवैध संरचनाओं को हटाने के दौरान लोगों का विस्थापन और पुनर्वास न होना एक प्रमुख समस्या है। वेरावल जैसे तटीय क्षेत्रों में बंदरगाह आधारित विकास के बावजूद नागरिक सुविधाओं की कमी है। सोमनाथ मंदिर के कारण बड़ी संख्या में पर्यटकों के आगमन से स्थानीय बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ता है, जिससे स्वच्छता और यातायात प्रबंधन की चुनौती बनी रहती है। तटीय जिला होने के कारण यहां चक्रवात और बाढ़ का खतरा बना रहता है, जिसके लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को लगातार काम करना पड़ता है। ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे का अभाव है।
तमिलनाडु के रामेश्वरम (रामनाथस्वामी मंदिर) रामनाथपुरम जिला धार्मिक और तटीय पर्यटन के बढ़ते आकर्षण के बावजूद अपर्याप्त बुनियादी ढांचा (जैसे: बेहतर सड़कें, आवास और सार्वजनिक सुविधाएं) मांग के अनुरूप तालमेल बिठाने में संघर्ष कर रहा है। रामेश्वरम और धनुषकोडी जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक भारी आवागमन के कारण सड़कों पर दबाव, जिससे अक्सर यातायात जाम की स्थिति बनती है। पीक सीजन में आवास, पार्किंग और स्वच्छता सुविधाओं की कमी, जो पर्यटकों के अनुभव को प्रभावित करती है। आंध्र प्रदेश का चित्तूर जिला तिरुपति बालाजी (वेंकटेश्वर मंदिर) ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के बावजूद विकास के मोर्चे पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। चित्तूर का 'हाई रोड' (ओल्ड मद्रास रोड) इतिहास के साथ विकसित हुआ है, लेकिन वर्तमान में यह यातायात जाम और बुनियादी ढांचे के अभाव के कारण विकास की मुख्यधारा से पिछड़ रहा है। शहर के मुख्य मार्गों पर भारी ट्रैफिक और संकरी सड़कें विकास में बड़ी बाधा हैं, जिससे आर्थिक गतिविधियां और सुगम आवागमन प्रभावित होता है। रोजगार के सीमित अवसरों के कारण, युवाओं को बेहतर अवसरों की तलाश में अन्य स्थानों पर पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। काशी के धार्मिक, पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व से इंकार नहीं है, किन्तु देश के अन्य समकक्ष धार्मिक स्थलों और मंदिरों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव भेदभाव पर सवाल उठाता रहेगा।
- योगेन्द्र योगी
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