बिहार में सरकार तो है पर एनडीए में आपसी विश्वास की कमी नजर आ रही

By अंकित सिंह | Jun 07, 2021

बिहार में एनडीए में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। भाजपा, जदयू, वीआईपी और हम पार्टी मिलकर नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में सरकार चला रहे हैं। सरकार के 6 महीने बीत जाने के बाद भी एनडीए के दलों में आपसी विश्वास की कमी नजर आ रही है। ऐसे कई मामले हैं जिसके सामने आते ही ऐसा लगता है कि कहीं ना कहीं नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार विश्वास की कमी से जूझ रही है। अभी हाल में ही टुन्ना पांडेय प्रकरण संपन्न हुआ भी नहीं था कि एक नया मामला सामने आ गया। भाजपा के विधान परिषद के सदस्य टुन्ना पांडेय ने नीतीश कुमार को परिस्थितियों का मुख्यमंत्री बताते हुए उन पर हमला किया था। इसके बाद पार्टी की ओर से टुन्ना पांडेय को नोटिस दिया गया और फिर निलंबित करने का फैसला किया गया। यह विवाद जैसे तैसे थमा।

 

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टुन्ना पांडेय के निष्कासन के बाद यह तय हुआ कि सभी पार्टियां सार्वजनिक तौर पर किसी बयान बाजी से बचेंगे। लेकिन यह बहुत ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया और ठीक उसके अगले ही दिन हाल में ही जनता दल यू में शामिल हुए उपेंद्र कुशवाहा ने एक ऐसा बयान दे दिया जिसके बाद बिहार में एक बार फिर से सियासी चर्चा तेज हो गई। दरअसल, नीति आयोग की रिपोर्ट आने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार को विशेष राज्य की दर्जा दिए जाने की मांग शुरू कर दी। अपने ट्वीट में उपेंद्र कुशवाहा ने लिखा कि वर्तमान दर पर अन्य राज्यों की बराबरी संभव नहीं है और नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट इसका प्रमाण है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दे।

 

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कुशवाहा के इस ट्वीट के तुरंत बाद हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री तथा एनडीए सरकार के सहयोगी जीतन राम मांझी ने भी ट्वीट कर दिया। जीतन राम मांझी ने कहा कि बुनियादी ढांचे को ठीक करने के लिए विशेष राज्य के दर्जे की जरूरत है। इसके बाद मांझी ने कहा कि डबल इंजन की सरकार में विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिला तो कभी नहीं मिलेगा। यह बात तब की गई है जब नीति आयोग की रिपोर्ट में बिहार सबसे पिछड़े राज्यों में शामिल हुआ। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब एनडीए में इस तरह की बयानबाजी का दौर शुरू हुआ है। पिछले 6 महीने में ऐसे कई मौके आए जब एनडीए में बयानबाजी का दौर लगातार जारी रहा।

 

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अभी हाल में ही मुकेश सहनी और जीतन राम मांझी ने पंचायत चुनाव को लेकर नीतीश सरकार द्वारा लिए गए फैसले की आलोचना की। इसके अलावा दोनों ही नेताओं ने पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर भी सवाल उठाए थे। विशेष राज्य के दर्जे की मांग वाली इस बयान पर कहीं ना कहीं भाजपा बैकफुट पर आ रही है। भाजपा का मानना है कि इस तरह की मांग से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के सामने एक नया मसला उठने लगेगा। इसके अलावा भाजपा नीतीश कुमार के उस आदेश के भी खिलाफ है जो पिछले दिनों लिया गया। उस आदेश में कहा गया था कि लॉकडाउन के दौरान कोई भी नेता या विधायक राज्य का दौरा नहीं करेगा और ना ही कोई निरीक्षण करने जाएगा।

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