जम्मू कश्मीर में अभी भी सीमा पर रहने वालों लोगों में खौफ, असुरक्षित महसूस करते हैं ग्रामीण, कहा- पाकिस्तान पर भरोसा नहीं

By Renu Tiwari | May 16, 2025

भारत-पाकिस्तान सीमा पर स्थित गांवों के निवासियों में असुरक्षा की गहरी भावना अब भी व्याप्त है, हालांकि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आठ दिनों तक चली युद्ध जैसी स्थिति से उत्पन्न हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। ग्रामीणों को डर है कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच सैन्य कार्रवाई समाप्त करने के लिए बनी सहमति का फिर से उल्लंघन होगा। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें ‘‘पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है’’।

ऐसी ही भावना प्रकट करते हुए आर एस पुरा सेक्टर के गुलाबगढ़ बस्ती के नंबरदार सरवन चौधरी ने कहा, ‘‘फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण दिख रही है, लेकिन सुरक्षा की भावना गायब है। पाकिस्तान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। सैन्य कार्रवाई समाप्त करने के लिए सहमति टूटने को लेकर लगातार खतरा बना हुआ है। हम केवल यही प्रार्थना कर सकते हैं कि शांति बनी रहे।’’

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अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित अरनिया शहर, आर एस पुरा, खौर और आसपास की बस्तियों को आठ से 10 मई तक पाकिस्तानी गोलाबारी, ड्रोन हमले और गोलीबारी का खामियाजा भुगतना पड़ा। अपने परिवार के साथ जम्मू शहर में एक रिश्तेदार के घर से लौटे कोरोटाना गांव के निवासी मुंशी राम ने कहा कि उन्होंने कई युद्ध देखे हैं, लेकिन यह पहली बार था, जब उन्होंने ड्रोन और तोपखाने का इतना भारी इस्तेमाल देखा। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सेना की सतर्कता के कारण नुकसान कम हुआ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दोनों देशों के बीच युद्ध विराम पर सहमति बन गई है, लेकिन सीमा पर रहने वाले सभी लोगों के चेहरे पर डर साफ झलक रहा है क्योंकि पाकिस्तान एक दुष्ट देश है।’’ सशस्त्र संघर्ष के निशान अब भी बस्तियों में दिखाई दे रहे हैं - क्षतिग्रस्त घर, दीवारों पर लगे छर्रे, टूटी खिड़कियां, खून के धब्बे और मृत एवं घायल मवेशी हाल में हुई गोलाबारी की याद दिलाते हैं। कांता देवी (62) ने सेना की जवाबी कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सेना ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया।

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सरकार ने सैन्य कार्रवाई को समाप्त करने के लिए सहमति पर पहुंचकर सही काम किया।’’ सीमा से महज पांच किलोमीटर दूर अरनिया पिछले सप्ताह गोलाबारी के दौरान एक वीरान शहर में तब्दील हो गया था, जहां मवेशियों और घरों की देखभाल के लिए पास की बस्तियों में केवल मुट्ठी भर पुलिसकर्मी और ग्रामीण ही बचे थे।

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