By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 13, 2026
भारत के एक शोध संस्थान ने सरकार से विदेशी उपग्रह सेवा प्रदाताओं पर कड़ी और ऐसी शर्तें लगाने का आग्रह किया है, जिनसे कोई समझौता न किया जाए। समूह का कहना है कि एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की स्टारलिंक सेवा अमेरिका को संचार बुनियादी ढांचे पर रणनीतिक बढ़त दे सकती है और भारत की प्रौद्योगिकी संप्रभुता को कमजोर कर सकती है। कूटनीति फाउंडेशन की नवंबर, 2024 में प्रकाशित और अक्टूबर, 2026 में अद्यतन रिपोर्ट में स्टारलिंक को स्पष्ट रूप से भू-राजनीतिक नियंत्रण का एक माध्यम बताया गया है।
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के स्वामित्व वाली स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित उपग्रहों के जरिये इंटरनेट सेवा देती है। यह सेवा खास तौर पर उन दूरदराज के इलाकों के लिए उपयोगी है, जहां मोबाइल नेटवर्क और ब्रॉडबैंड केबल लगाना मुश्किल या महंगा है। स्टारलिंक 2021 से भारत में प्रवेश की कोशिश कर रही है।
उसे जून, 2025 में प्रमुख लाइसेंस मिले थे और अगले महीने अंतरिक्ष नियामक भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) से अनुमति मिली थी। हालांकि, अंतिम सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन लंबित होने के कारण वह अब तक भारत में अपनी सेवाएं शुरू नहीं कर पाई है। लंबित मुद्दों में सुरक्षा मंजूरी, विदेशी निवेश की अनुमति और स्पेक्ट्रम आवंटन की व्यवस्था शामिल हैं।
अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या उपग्रहों के बीच सीधे संपर्क की सुविधा के जरिये भारत का डेटा घरेलू गेटवे को दरकिनार कर बाहर भेजा जा सकता है। सेवा शुरू होने में देरी से नाराज मस्क ने पिछले सप्ताह आरोप लगाया था कि ‘‘प्रभावशाली कारोबारी समूह’’ स्टारलिंक को भारत में प्रवेश करने से रोक रहे हैं। हालांकि, संचार मंत्रालय ने इस आरोप को निराधार बताया था।
मंत्रालय ने कहा था कि तीन उपग्रह सेवा प्रदाता- स्टारलिंक, यूटेलसैट वनवेब और जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशंस- मंजूरी की प्रक्रिया में लगभग एक ही स्तर पर हैं। तीनों को व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन का इंतजार है। कुटनीति फाउंडेशन ने अमेरिकी रक्षा और खुफिया एजेंसियों के साथ स्पेसएक्स के अनुबंधों का हवाला देते हुए कहा कि उपग्रह संचार का इस्तेमाल व्यावसायिक उद्देश्यों के साथ-साथ रणनीतिक मकसद के लिए भी किया जाता है।