Intermittent Fasting: वजन घटाने का यह Popular Trend सेहत पर पड़ सकता है भारी, जानें Side Effects

By अनन्या मिश्रा | Apr 21, 2026

आज के समय में 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' वजन घटाने और फिटनेस के लिए सबसे लोकप्रिय डाइट ट्रेंड बना हुआ है। इसमें एक व्यक्ति एक निश्चित समय के लिए उपवास करता है और बाकी समय भोजन करता है। वहीं कुछ शोध में यह सामने आया है कि बिना एक्सपर्ट की सलाह के और अधूरी जानकारी के 'इंटरमिटेंट फास्टिंग' अपनाना शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। वहीं यह फास्टिंग सिर्फ कैलोरी को कम करने का तरीका नहीं, बल्कि यह शरीर के हार्मोनल असंतुलन और मेटाबॉलिज्म को पूरी तरह से बदल देता है।

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मेंटल हेल्थ पर असर

इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे गहरा और पहला असर हमारे हार्मोन्स और दिमाग पर होता है। लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में 'कोर्टिसोल' का लेवल बढ़ सकता है। जिस कारण नींद न आने और तनाव की समस्या होती है।

महिलाओं पर असर

इंटरमिटेंट फास्टिंग विशेष रूप से महिलाओं के लिए खतरनाक है। क्योंकि य़ह फास्टिंग महिलाओं के मासिक चक्र को बाधित कर सकता है। वहीं शुगर लेवल में बार-बार होने वाले उतार-चढ़ाव होने से व्यक्ति को दिनभर धुंधलापन, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी महसूस हो सकती है।

पोषक तत्वों की कमी

इस फास्टिंग के दौरान लोग सिर्फ फैट नहीं बल्कि मांसपेशियों को धीरे-धीरे खोने लगते हैं। जब आपके शरीर को पर्याप्त समय तक पोषण नहीं मिलता है। तो शरीर ऊर्जा के लिए मांसपेशियों को तोड़ना शुरूकर देता है। अगर आपके आहार में प्रोटीन की सही मात्रा नहीं है, तो वेट तो कम होगा। लेकिन शरीर में ढीलापन और कमजोरी आ जाएगी। भोजन की सीमित अवधि की वजह से शरीर को मिनरल्स और विटामिन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते हैं।

एक्सपर्ट की सलाह लें

हर किसी के शरीर के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग उपयुक्त नहीं है। लो ब्लड प्रेशर, टाइप-1 डायबिटीज और ईटिंग डिसऑर्डर के शिकार लोगों को इस फास्टिंग से बचना चाहिए। अगर आप इसको शुरू करना चाहते हैं, तो अपने शरीर को अचानक से झटका देने की जगह धीरे-धीरे बदलाव करें। साथ ही पर्याप्त पानी का सेवन करें।

वहीं किसी डायटीशियन या डॉक्टर से परामर्श लेकर अपना डाइट चार्ट तैयार कर लें। फिटनेस का मतलब सिर्फ पतला होना नहीं बल्कि शरीर का अंदरूनी रूप से संतुलित और मजबूत होना है।

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