By अंकित सिंह | Apr 21, 2026
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल में एक रैली में एक प्रसिद्ध उद्धरण को गलत तरीके से उद्धृत करने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आलोचना करते हुए उन्हें बुलडोजर बुद्धि कहा, जिसके बाद समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी इस बहस में शामिल हो गए और कहा कि केवल उन्हीं लोगों का नाम बदला जाता है जो अपना नाम बदलते हैं। यादव की टिप्पणी आदित्यनाथ के शासनकाल में स्थानों और संस्थानों के नाम बदलने पर एक तीखा प्रहार प्रतीत होती है।
वीडियो में लिखा था कि योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर भाजपा की बंगाल के इतिहास के प्रति घोर अज्ञानता और अवमानना को उजागर किया है। उन्होंने अमर कथन ‘मुझे रक्त दो और मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ स्वामी विवेकानंद के नाम से उद्धृत किया है। जबकि यह कथन नेताजी सुभाष चंद्र बोस का है। X पर पोस्ट में आगे लिखा गया कि दो बिल्कुल अलग व्यक्तित्व। दो बिल्कुल अलग विरासतें। दोनों बंगाल के सपूत। दोनों को एक ही व्यक्ति ने एक ही वाक्य में अपमानित किया। वे स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस में अंतर नहीं कर पाते। वे गलत उद्धरण देते हैं। वे स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माला चढ़ाते हुए उन्हें नेताजी कहते हैं। और फिर भी इन्हीं लोगों में ‘सोनार बंगला’ बनाने का दुस्साहस है। उनकी अज्ञानता की गहराई उनके अहंकार के बराबर ही है।