By अनन्या मिश्रा | Mar 09, 2023
देश के कुछ हिस्सों में चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। यह त्योहार होली के अगले दिन मनाया जाता है। इस वर्ष यह त्योहार 9
होली भाई दूज 2023 मुहूर्त
हिंदू पंचाग के अनुसार, चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि की शुरूआत 8 मार्च 2023 को शाम 07:42 बजे से होगी। यह तिथि 9 मार्च 2023 को रात 08:54 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। आज के दिन दोपहर के समय भाई को बहनें तिलक कर भोजन करवाती हैं। होली भाई दूज के दिन तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर 12:31 से 02:00 तक रहेगा। इस मुहूर्त में तिलक किया जाएगा।
महत्व
बता दें कि पारंपरिक भाई दूज के पर्व का खास महत्व है। यह त्योहार भाई-बहन के प्रेम को और अधिक मजबूत बनाता है। होली भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई को घर पर भोजन के लिए आमंत्रित करती हैं। फिर तिलक कर भोजन करवाती हैं। इससे उनके जीवन से संकट का नाश होकर खुशियां आती हैं। वहीं कहते हैं कि आज के दिन भाई-बहन द्वारा यमुना नदी में स्नान करने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है। इस कुछ महिलाएं व्रत भी रखती है।
ऐसे करें तिलक
होली भाई दूज के दिन बहनें सूर्यास्त से पहले उठकर चंद्र देव के दर्शन करें। फिर स्नान आदि कर तिलक की थाली तैयार कर उसमें फूल, अक्षत, मिठाई, दीपक और कलावा आदि रख लें। भाई को भोजन के लिए आमंत्रित करें। इसके बाद सबसे पहले भगवान गणपति और विष्णुजी की पूजा-अर्चना करें। चावल की चौक पर लकड़ी का पाट डालें फिर उसी पर भाई को उत्तर-पश्चिम दिशा में मुंह करके बैठाएं।
इसके बाद भाई का तिलक कर उसे कलावा बांधकर मुंह मीठा करवाएं। वहीं श्रीहरि और भगवान गणेश से भाई की लंबी उम्र की कामना करनी चाहिए। भाई को भोजन कराने के बाद ही उसे घर से विदा करना चाहिए। इस दिन तिलक होने के बाद भाई बहन को उपहार भी देते हैं।
पौराणिक कहानी
पौराणिक कहानी के अनुसार, आज के दिन भगवान सूर्यदेव के पुत्र यमराज को उनकी बहन यमुना ने घर पर खाने के लिए आमंत्रित किया था। जब धर्मराज बहन यमुना के घर पहुंचे तो यमुना ने पूरे श्रद्धाभाव से अपने भाई का आदर-सत्कार करते हुए उनका तिलक आदि कर पूजा की और फिर भोजन करवाया। बहन के सत्कार से खुश होकर यमराज ने बहन यमुना से वरदान मांगने के लिए कहा। इस पर यमुना ने उनके प्रकोप से बचने का उपाय पूछा। धर्मराज ने कहा कि जो भी चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि को यमुना में डुबकी लगाकर अपने भाई का तिलक आदि करेगा, उसकी कभी अकाल मृत्यु नहीं होगी और मृत्यु के बाद वह बैकुंठ को प्राप्त करेगा। तभी से होली के बाद भाई दूज का पर्व मनाया जाने लगा।