By एकता | Apr 12, 2026
भारतीय संगीत जगत की सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक, आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। सुरों और मौलिकता के अद्भुत मेल के लिए जानी जाने वाली आशा जी ने आठ दशकों तक संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया। आइए उनके जीवन के कुछ सुनहरे पहलुओं पर नजर डालते हैं:
आशा जी अपनी सुरीली आवाज और हर तरह के गाने गाने की क्षमता के लिए प्रसिद्ध थीं। उन्होंने फिल्म संगीत, पॉप, शास्त्रीय, भजन, गजल, कव्वाली और रवींद्र संगीत जैसी विभिन्न शैलियों में महारत हासिल की। उन्होंने 20 से अधिक भाषाओं में 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए।
म्यूजिक आइकन्स के साथ जुगलबंदी की बात करें तो पचास से सत्तर के दशक के स्वर्णिम युग में उन्होंने मोहम्मद रफी, किशोर कुमार और आर.डी. बर्मन जैसे दिग्गजों के साथ मिलकर संगीत के नए मानक स्थापित किए।
आशा भोसले के योगदान को देश और दुनिया ने कई बड़े सम्मानों से नवाजा गया, इनमें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (2000), पद्म विभूषण (2008), 1981 में 'उमराव जान' (दिल चीज क्या है) और 1987 में 'इजाजत' (मेरा कुछ सामान) के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार शामिल है।
उनकी गायकी की रेंज इतनी बड़ी थी कि उन्होंने एक तरफ 'इन आंखों की मस्ती' जैसी गंभीर गजलें गाईं, तो दूसरी तरफ 'पिया तू अब तो आजा' और 'ये मेरा दिल' जैसे जोशीले कैबरे गीतों में जान फूंक दी। 90 के दशक में भी उन्होंने ए.आर. रहमान के साथ 'रंगीला रे' और 'तन्हा तन्हा' जैसे गानों के जरिए युवाओं के बीच अपनी लोकप्रियता बनाए रखी। 2013 में उन्होंने फिल्म 'माई' में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर काम किया, जहां उनके अभिनय की भी काफी सराहना हुई।
भोंसले की लोकप्रियता भारत तक ही सीमित नहीं थी। 1997 में ब्रिटिश बैंड 'कॉर्नरशॉप' ने उन्हें समर्पित गाना 'ब्रिमफुल ऑफ आशा' रिलीज किया था, जो यूके के चार्ट्स में टॉप पर रहा। आशा भोसले भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी जादुई आवाज और सदाबहार गीतों के जरिए वे हमेशा अपने प्रशंसकों के दिलों में जीवित रहेंगी।