By अभिनय आकाश | Jul 23, 2026
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका और सऊदी अरब के बीच सिविल न्यूक्लियर डील इस बात पर निर्भर करती है कि सऊदी अरब 'अब्राहम समझौते' में शामिल होता है या नहीं। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि डील के तहत किसी भी तरह की "सामग्री का संवर्धन" (enrichment of material) नहीं होगा और इसमें सिर्फ़ सिविल न्यूक्लियर गतिविधियां ही शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका के ऊर्जा विभाग और सऊदी अरब के बीच जो सिविल न्यूक्लियर डील (इसमें मटीरियल का एनरिचमेंट नहीं होगा!) हो रही है - जो सिर्फ़ गैर-सैन्य इस्तेमाल के लिए है, जैसा कि ईरान और UAE (और दूसरे देशों) के पास पहले से है। उसे मंज़ूरी तो मिल जाएगी, लेकिन यह पूरी तरह से सऊदी अरब के बहुत सम्मानित और सफल 'अब्राहम समझौते' में शामिल होने पर निर्भर करेगा। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर अपनी पोस्ट में कहा कि अमेरिका सिविल (बिना एनरिचमेंट वाली) न्यूक्लियर सुविधाओं के ख़िलाफ़ नहीं है।
अब्राहम समझौते की बात करें तो यह समझौतों का एक समूह है जिसका प्रस्ताव 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान रखा गया था। इनका मकसद अरब देशों और इज़राइल के बीच संबंधों को सामान्य बनाना और उनके बीच द्विपक्षीय संबंध स्थापित करना था। अब तक, केवल चार देशों ने अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं: संयुक्त अरब अमीरात (UAE), बहरीन, मोरक्को और सूडान। सऊदी अरब अब्राहम समझौते से दूर रहा है और उसका कहना है कि समझौते में शामिल होने के लिए इज़राइल और फ़िलिस्तीन के बीच शांति का रास्ता बनाना ज़रूरी है। उसका प्रस्ताव है कि अब्राहम समझौते में शामिल होने का फ़ैसला करने से पहले एक स्वतंत्र फ़िलिस्तीनी राज्य की स्थापना होनी चाहिए।