Prabhasakshi NewsRoom: 'तानाशाहों के साथ खड़े हुए Modi', Trump के करीबी Peter Navarro ने फिर उगली आग

By नीरज कुमार दुबे | Sep 02, 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो आजकल रोजाना भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अनर्गल टिप्पणियां कर रहे हैं। अपनी ताजा टिप्पणी में पीटर नवारो ने कहा है कि यह “शर्मनाक” है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया के “दो सबसे बड़े अधिनायकवादी तानाशाहों” के साथ मंच साझा किया। पत्रकारों से बातचीत में नवारो ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को आगे आकर यूरोप और यूक्रेन के साथ खड़ा होना चाहिए और रूस से तेल खरीदना बंद करना चाहिए।

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हम आपको बता दें कि यह बयान उस समय आया जब एक दिन पहले ही व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार ने अमेरिका-भारत व्यापार विवाद पर आग भड़का दी थी। उन्होंने भारत द्वारा परिष्कृत रूसी तेल पश्चिम को बेचने के संदर्भ में आरोप लगाया था कि “ब्राह्मण भारतीय जनता की कीमत पर मुनाफाखोरी कर रहे हैं।” फॉक्स न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में नवारो ने कहा, “देखिए, मोदी एक महान नेता हैं। लेकिन मैं समझ नहीं पा रहा कि वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता होकर भी पुतिन और शी जिनपिंग के साथ क्यों खड़े हो रहे हैं। मैं सिर्फ भारतीय जनता से इतना कहूंगा— कृपया समझिए कि यहां क्या हो रहा है। ब्राह्मण भारतीय जनता की कीमत पर मुनाफा कमा रहे हैं। इसे रुकना चाहिए। और हां, हम इस पर बारीकी से नज़र रखेंगे।”

हम आपको बता दें कि नवारो ने भारत पर कई बार कटाक्ष किए हैं क्योंकि भारत रूस के साथ व्यापार रोकने से इंकार करता रहा है। इनमें रूस-यूक्रेन युद्ध को “मोदी का युद्ध” कहना, भारत को “क्रेमलिन की लॉन्ड्री” बताना और नई दिल्ली पर यूक्रेन युद्ध से मुनाफा कमाने का आरोप लगाना शामिल है। हम आपको बता दें कि पिछले महीने की शुरुआत में ही ट्रंप प्रशासन ने रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर हमले तेज कर दिए थे। नवारो ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को “मोदी का युद्ध” करार दिया और नई दिल्ली को बीजिंग और मास्को के करीब जाने से सावधान किया। उन्होंने कहा था, “भारत, तुम दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र हो, ठीक है? तो लोकतंत्र की तरह व्यवहार करो। लोकतंत्रों के साथ खड़े हो। इसके बजाय तुम अधिनायकवादियों के साथ खड़े हो रहे हो।” यह बयान उस समय दिया गया जब भारत पर 50% टैरिफ लागू हुए कुछ ही घंटे बीते थे। हम आपको बता दें कि ट्रंप ने भारत पर 25% पारस्परिक शुल्क लगाया है और रूसी तेल खरीद के लिए अतिरिक्त 25% शुल्क भी जोड़ा है।

दूसरी ओर, भारत ने इन शुल्कों को “अनुचित और अव्यावहारिक” बताया है। भारत का कहना है, “किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”

इसी बीच, शुक्रवार को अमेरिकी अपील न्यायालय (US Court of Appeals for the Federal Circuit) ने ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक शुल्कों को ज्यादातर अवैध ठहराया है। इसके बाद, प्रतिनिधि सभा की विदेश मामलों की समिति के डेमोक्रेट्स ने स्पीकर माइक जॉनसन से अमेरिकी सांसद ग्रेगरी मिक्स के उस प्रस्ताव को सदन में लाने की मांग की जिसमें ट्रंप की “राष्ट्रीय आपातकाल” की घोषणा को समाप्त करने की बात कही गई है, जिसके आधार पर उन्होंने भारी शुल्क लगाए थे। सोशल मीडिया पोस्ट में ग्रेगरी मिक्स को उद्धृत करते हुए समिति ने यह भी कहा कि स्पीकर को ट्रंप की “गैर-कानूनी गतिविधियों” को ढकना बंद करना चाहिए।

बहरहाल, देखा जाये तो अमेरिका भारत को अपनी धुरी में देखना चाहता है यानि रूस से दूर और चीन के खिलाफ। लेकिन भारत अब एक परिपक्व शक्ति है, जो बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में संतुलन साधने की राह पर है। नवारो का यह कहना कि "यह मोडी का युद्ध है" न केवल हास्यास्पद है बल्कि यह भी दर्शाता है कि वाशिंगटन अभी भी भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को पचाने में असमर्थ है। भारत को चाहिए कि वह इन आरोपों को भावनात्मक प्रतिक्रिया से नहीं, बल्कि ठंडे दिमाग और अपने हितों पर आधारित कूटनीति से जवाब दे। अमेरिका की नाराज़गी अस्थायी है, परंतु भारत की ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा स्थायी प्रश्न हैं। और इन पर किसी भी बाहरी दबाव को स्वीकार करना एक लोकतांत्रिक भारत के लिए संभव नहीं।

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