By अभिनय आकाश | Jan 01, 2026
अमेरिका ने इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू के सामने तुर्की का नाम लेकर एक ऐसा बयान दे दिया जिसने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि ट्रंप आखिर क्या खेल खेल रहे हैं। फ्लोरिडा में नेतन्याहू के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए ट्रंप ने अचानक तुर्की के राष्ट्रपति की तारीफ करना शुरू कर दी। इतना ही नहीं ट्रंप ने तुर्की को अपना अच्छा दोस्त भी बताया और यह तक कह दिया कि अमेरिका तुर्की को एफ 35 फाइटर जेट देने का गंभीरता से विचार कर रहा है। अब यह बयान इजराइल के लिए किसी झटके से कम नहीं था क्योंकि तुर्की और इजराइल के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। सीरिया गाज़ा और पूर्वी भूमध्य सागर में दोनों देशों के हित सीधे टकराते हुए नजर आए हैं और यह पूरी दुनिया ने देखा है। वहीं याद दिला दें कि 2019 में अमेरिका ने तुर्की को एफ 35 प्रोग्राम से बाहर कर दिया था। क्योंकि तब तुर्की ने रूस से S400 मिसाइल सिस्टम खरीदा था। इससे अमेरिका भड़क गया था। लेकिन अब ट्रंप का यह यूटर्न कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
दरअसल एफ 35 दुनिया के सबसे आधुनिक लड़ाकू विमानों में गिने जाते हैं। इजराइल का मानना है कि अगर तुर्की को यह विमान मिलते हैं तो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदल सकता है। खासतौर पर सीरिया जैसे संवेदनशील इलाकों में अगर तुर्की को यह विमान मिलता है तो वह पूरे क्षेत्र में सैन्य रूप से कहीं ज्यादा ताकतवर हो सकता है। इजराइल नहीं चाहता कि इस इलाके में कोई सैन्य बढ़त हासिल करें। इजराइल और तुर्की टकराव की असली जड़ क्या है? उस पर अब एक नजर डाल लेते हैं। दरअसल इजराइल और तुर्की के बीच तनाव केवल हथियारों तक सीमित नहीं है। सीरिया, गाजा और पूरे पूर्वी भूमध्य सागर में दोनों देशों के हित टकराते हैं। 23 दिसंबर को ग्रीस, साइप्रस और इजराइल के त्रिपक्षीय सम्मेलन में नेतन याहू ने खुले तौर पर तुर्की को चेतावनी तक दे डाली थी। इस बीच एक और बड़ा घटनाक्रम यह भी सामने आया कि इजराइल ने सोमा लीलैंड को मान्यता दे दी है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विवादित इलाका है।
आपको बता दें कि इस कदम के बाद तुर्की, पाकिस्तान और कई मुस्लिम देशों में नाराजगी देखने को मिली। क्योंकि विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल का यह कदम लाल सागर में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने का है और अफ्रीका में तुर्की के बढ़त प्रभाव को संतुलित करने का भी है। और वहीं आपको यह भी बता दें कि तुर्की का इस क्षेत्र में पहले से ही सैन्य और कूटनीतिक प्रभाव रहा है। तुर्की यहां पर लगातार प्रयास कर रहा है कि वह अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाएं और इस पूरे इलाके में अपना प्रभाव जमाए। और अब जब इजराइल की एंट्री इसकी सीमाकरण में हुई है तो इसके बाद सब कुछ बदलता हुआ नजर आ रहा है।